सिंघु बॉर्डर पर किसान संगठनों ने बैठक के बाद केंद्र सरकार की तरफ से भेजे गए प्रस्ताव को खारिज कर दिया है. इसके साथ ही किसान नेताओं ने आंदोलन को और तेज करने की घोषणा की है. सरकार के प्रस्ताव को खारिज करने के बाद किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा कृषि बिल को वापस लेना होगा या फिर सरकार MSP को लेकर भी विधेयक लाए.

राकेश टिकैत ने कहा, जो प्रस्ताव आया है उसमें बिल वापसी की बात नहीं है. सरकार संशोधन चाहती है. संशोधन के लिए किसान तैयार नहीं है. हम चाहते है पूरा बिल वापस हो. बिल वापसी के अलावा कोई रास्ता निकलता नज़र नहीं आ रहा है. सरकार तीन कृषि बिल लाई है उसी तरह से MSP को लेकर भी बिल लाए.

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वहीं किसान नेता मंजीत सिंह ने कहा, सिंघु बॉर्डर पर किसान प्रदर्शनकारी डटे हुए हैं. "सरकार की मंशा ठीक नहीं है. सरकार चाहती है यह आंदोलन लंबा चले और कमजोर पड़ जाए. सरकार गलतफहमी में है. हमारा आंदोलन बढ़ रहा है. यहां से 5,000 लोग जाते हैं लेकिन 20,000 लोग आते भी हैं. सरकार पर दबाव बढ़ रहा है.

नये कृषि कानूनों पर केंद्रीय गृह मंत्री के, किसानों के 13 प्रतिनिधियों से मुलाकात करने के एक दिन बाद बुधवार को केंद्र की तरफ से किसानों को प्रस्ताव भेजा गया था. प्रस्ताव में सरकार ने कहा था कि वह वर्तमान में लागू न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की व्यवस्था को जारी रखने के लिए ‘‘लिखित में आश्वासन’’ देने को तैयार है.

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किसान नेता दर्शन पाल ने कहा कि किसानों ने कानून में प्रस्तावित संशोधन को खारिज कर दिया है क्योंकि वे कानूनों को निरस्त किये जाने से कम कुछ नहीं चाहते.

उन्होंने कहा कि नए मसौदा में कुछ भी नया नहीं है, जो केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर किसान नेताओं के साथ अपनी पूर्व की बैठकों में नहीं कहा हो. उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारी किसान 14 दिसंबर को राष्ट्रीय राजधानी के सभी राजमार्गों को बंद करेंगे और जिला मुख्यालयों के साथ ही भाजपा के जिला कार्यालयों का भी घेराव करेंगे.