राजस्थान कांग्रेस में एक महीने तक चली सियासी घमासान के बाद पार्टी के नेताओं के सुर बदलने लगे हैं. राजस्थान के पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट ने कहा है कि यह पार्टी के लिए जरूरी था. पार्टी में राजनीतिक द्वेष गिलानी की कोई जगह नहीं होती है. उन्होंने कहा कि वह किसी पद के इच्छा नहीं रखते हैं. हमें जनता के विश्वास को मजबूत करने की दिशा में काम करने की आवश्यकता है.

वहीं सीएम गहलोत ने ANI से कहा कि जो एपिसोड हुआ है, एक प्रकार से भूलो और माफ करो की स्थिति में रहें, सब मिलकर चलें, क्योंकि प्रदेशवासियों ने विश्वास करके हमारी सरकार बनाई थी. हमारी सबकी ज़िम्मेदारी उस विश्वास को बनाए रखने और प्रदेश की सेवा करने की बनती है.

इसके साथ ही गहलोत ने ये भी कहा कि हम सब आपस में मिलकर काम करेंगे, जो हमारे साथी चले गए थे वो भी वापस आ गए ​हैं. मुझे उम्मीद है कि सब गिले-शिकवे दूर करके सब मिलकर प्रदेश की सेवा करने का संकल्प पूरा करेंगे.

बता दें, कांग्रेस में बीते दिन चल रहे घमासान के बीच सीएम अशोक गहलोत ने सचिन पायलट के खिलाफ खुलकर सामने आए थे. उन्होंने सचिन पायलट को 'निकम्मा' तक कह दिया था.

इसके जवाब में सचिन पायलट ने इसके जवाब में कहा था कि मैं इस पर कोई टिप्पणी करना नहीं चाहता हूं मैंने अपने परिवार से कुछ संस्कार हासिल किए हैं. कितना भी मैं किसी का विरोध करुं किसी भी दल का नेता हो मेरा कट्टर दुश्मन भी हो. मैंने कभी ऐसी भाषा का प्रयोग नहीं किया. अशोक गहलोत जी उम्र में मुझसे काफी बड़े हैं और व्यक्तिगत रूप से मैंने उनका सम्मान ही किया है.

सचिन पायलट ने बताया कि, बैठक में, प्रियंका गांधी और राहुल गांधी ने हमारी शिकायतों को धैर्यपूर्वक सुना और आश्वासन दिया कि उन्हें हल करने के लिए एक रोड मैप तैयार किया जाएगा.