मधुमालती का पौधा एक विशेष प्रकार की फूल वाली बेल होती है जो उम्र के साथ रंग बदलती है. मधुमालती के पौधे के सुंदर फूल में एक दिव्य सुगंध होती है और इसका रंग सफेद से गुलाबी से लाल तक भिन्न होता है. मधुमालती की पत्तियाँ अण्डाकार होती हैं जिनका आधार गोल आधार होता है जिसमें हरे से पीले-हरे रंग होते हैं.

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मधुमालती के फायदे :

मधुमालती के पेड़ के लगभग हर भाग का आयुर्वेदिक उपचार में प्रयोग होता है.

सर्दी-जुकाम और कफ की दिक्कत – 1 ग्राम तुलसी के पत्ते, 2-3 लौंग, 1 ग्राम मधुमालती के फूल, पत्ते का काढ़ा बनायें, ये काढ़ा दिन में 2-3 बार पियें, लाभ होगा.

डायबिटीज की समस्या – मधुमालती के 5-6 पत्तों या फूल का रस निकालकर पियें. करीब 4 ml रस दोनों टाइम पियें.

ल्यूकोरिया या श्वेत प्रदर – इसके इलाज के लिए मधुमालती की पत्ती और फूल का रस पियें.

इस आसान और तेजी से बढ़ने वाली बेल को किसी भी प्रकार की मिट्टी में लगाया जा सकता है. मिट्टी में थोड़ी नमी होनी चाहिए लेकिन पानी स्थिर नहीं होना चाहिए.

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नया पौधा तैयार करने के लिए उसे काटना एक आसान तरीका है. 3-4 इंच लंबी कटिंग लें, जिसमें 2-3 पत्ते हों. इस कलम का 1 इंच मिट्टी में दबा दें. इसे किसी छायादार स्थान पर रखें या इसके ऊपर पॉलिथीन की थैली रखें.

मधुमालती को किसी बड़े गमले में या जमीन पर लगाएं.एक बार अच्छी तरह जम जाने के बाद अगर इसे खाद न भी मिले तो भी ज्यादा फर्क नहीं पड़ता.

उसके चारों ओर कोई सहारा होना चाहिए, जिसकी मदद से वह ऊपर उठ सके.

इसे पूरे दिन में कम से कम 4 घंटे सूरज की रोशनी में रखें.

पौधे के शुरुआती सप्ताह में कम से कम दो बार पानी दें.

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डिस्क्लेमर:खबरों में दी गई टिप्स एक सामान्य जानकारी है. आप इसका इस्तेमाल करने से पहले विशेषज्ञों की सलाह ले सकते हैं.