पणजी, 22 मई (भाषा) गोवा सरकार द्वारा गठित एक विशेषज्ञ समिति ने सिफारिश की है कि स्तनपान कराने वाली माताओं को कोरोना वायरस महामारी की ‘‘तीसरी लहर’’ की आशंका के मद्देनजर प्राथमिकता के आधार पर टीका लगाया जाए जिसके बारे में डॉक्टरों का मानना ​​​​है कि यह अन्य आयु समूहों में से बच्चों को सबसे अधिक प्रभावित कर सकती है।

गोवा मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (जीएमसीएच) के डीन एवं समिति के प्रमुख डॉ. शिवानंद बांडेकर ने कहा कि तीसरी लहर के दौरान संक्रमित माताओं से बच्चों में कोरोना वायरस का संक्रमण फैल सकता है।

समिति की बैठक में भाग लेने के बाद उन्होंने संवाददाताओं से कहा, ‘‘दो साल से कम उम्र के बच्चों को स्तनपान कराने वाली माताओं और बीमारियों से पीड़ित माताओं को टीकाकरण में प्राथमिकता दी जानी चाहिए।’’

गोवा सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, राज्य में 3.5 लाख से 4 लाख बच्चे 18 साल से कम उम्र के हैं और 2.5 लाख बच्चे 12 साल से कम उम्र के हैं।

डॉ बांडेकर ने कहा कि समिति की यह सिफारिश मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत की अध्यक्षता वाले कार्यबल के समक्ष रखी जाएगी।

जीएमसीएच के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ जगदीश काकोदकर ने कहा कि गोवा में पहली लहर में कोरोना वायरस के कुल मामलों में से सात से आठ प्रतिशत मरीज बच्चे थे। दूसरी लहर के दौरान यह संख्या बढ़कर करीब 12 फीसदी हो गई। उन्होंने कहा, ‘‘यही स्वरूप पूरे भारत में देखा गया है।’’

काकोदकर ने कहा कि समिति ने यह भी प्रस्तावित किया कि नवजात आईसीयू बेड की संख्या बढ़ाई जाए और तीसरी लहर की स्थिति में मरीजों की देखभाल के लिए उत्तर और दक्षिण गोवा जिले में प्रत्येक में एक समर्पित बाल चिकित्सा अस्पताल स्थापित किया जाए।

डॉ काकोदकर ने कहा कि समिति ने यह भी सुझाव दिया कि वयस्कों के 50 प्रतिशत आईसीयू बिस्तरों को बाल चिकित्सा आईसीयू बिस्तर में परिवर्तित किया जाए। ।

उन्होंने कहा कि समिति ने तीसरी लहर के दौरान बच्चों के उपचार प्रोटोकॉल पर भी चर्चा की।

काकोदकर ने कहा, ‘‘गोवा में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) द्वारा निर्धारित प्रोटोकॉल का पालन किया जाएगा।’’

स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, गोवा में कोविड​​​​-19 मामलों की संख्या शुक्रवार तक 1,43,192 थी जबकि मृतक संख्या 2,302 थी।