कृषि कानून को लेकर सरकार और किसान संगठनों के बीच हुई 11वें दौर की वार्ता भी असफल रही. किसान नेताओं ने बताया कि, बैठक से मंत्री साढ़े तीन घंटे गायब रहे और हमें इंतजार कराया. इसके बाद उन्होंने बैठक को खत्म कर दिया. किसान नेताओं ने अपमान करने का आरोप लगाया है.

किसान मजदूर संघर्ष समिति के नेता एसएस पंधेर ने कहा, मंत्री ने हमें साढ़े तीन घंटे इंतजार करवाया. यह किसानों का अपमान है. जब वह आये, तो उन्होंने हमसे सरकार के प्रस्ताव पर विचार करने के लिए कहा और कहा कि वह बैठकों की प्रक्रिया को समाप्त कर रहे है.

राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिव कुमार कक्का ने कहा, लंच ब्रेक से पहले, किसान नेताओं ने खेत कानूनों को रद्द करने की अपनी मांग दोहराई और सरकार ने कहा कि वे संशोधन के लिए तैयार हैं. मंत्री ने हमें सरकार के प्रस्ताव पर विचार करने के लिए कहा और हमने उन्हें हमारे प्रस्ताव पर विचार करने के लिए कहा. उसके बाद मंत्री बैठक से चले गए.

वहीं, भारत किसान यूनियन के अध्यक्ष सुरजीत सिंह ने कहा, अगली वार्ता के लिए किसी तरह की तारीख तय नहीं की गई है.

राकेश टिकैत ने कहा, सरकार की तरफ से कहा गया कि 1.5 साल की जगह 2 साल तक कृषि क़ानूनों को स्थगित करके चर्चा की जा सकती है. उन्होंने कहा अगर इस प्रस्ताव पर किसान तैयार हैं तो कल फिर से बात की जा सकती है, कोई अन्य प्रस्ताव सरकार ने नहीं दिया.