मॉनसून सत्र के दौरान लोकसभा में केंद्रीय श्रम मंत्रालय की ओर से कहा गया है कि प्रवासी मजदूरों की मौत का डेटा सरकार के पास नहीं है. ऐसे में उन्हें मुआवजा नहीं दिया जा सकता है. इस बात पर विपक्षी पार्टी कांग्रेस नेता ने कहा कि ये अनोखा देश बन गया है जहां मरने वाले प्रवासी मजदूरों का डेटा ही नहीं है.

दरअसल, सरकार से पूछा गया था कि कोरोना वायरस महामारी में लॉकडाउन के दौरान जो परिवार घर पहुंचने की कोशिश में मर गए क्या उन परिवारों को मुआवजा दिया गया? इसके जवाब में सरकार ने कहा कि ऐसा कोई डेटा मेंटेन नहीं किया गया है.

विपक्ष ने सरकार से प्रवासी मजदूरों का डेटा और जान गंवाने वाले प्रवासी मजदूरों के आंकड़ों के बारे में पूछा और साथ ही उन्हें मुआवजा मिला या नहीं ये भी सरकार से पूछा गया, इस पर केंद्रीय श्रम मंत्री संतोष कुमार गंगवार ने लिखित जवाब में बताया कि, ऐसा कोई डेटा मेंटेन नहीं किया गया है. ऐसे में इस पर कोई सवाल नहीं उठता है.'

वहीं, कांग्रेस के नेता पी चिदंबरम ने सरकार पर निशाना साधते हुए ट्वीट कर कहा, 'भारत आज एक ऐसा अनोखा देश बन गया है, जहां ऐसे प्रवासियों का कोई डेटा नहीं है, जो घर वापस आने के बाद लंबे समय तक घर पर रहे या मर गए.'

उन्होंने ये भी कहा कि, भारत आज एक अनूठा संसदीय लोकतंत्र बन गया है,जहां कोई प्रश्न नहीं पूछा जा सकता और जहां कोई बहस की अनुमति नहीं है.