(पायल बनर्जी और प्रशांत रांगनेकर)

नयी दिल्ली, 26 मई (भाषा) भारत में बायोलॉजिकल ई. द्वारा बनाए जाने वाले जॉनसन एंड जॉनसन टीका को सीधे घरेलू बाजार में नहीं उतारा जाएगा और कंपनी के साथ समझौते के मुताबिक पूरा टीका अमेरिकी दवा कंपनी को सौंपा जाएगा, लेकिन सरकार इसके उत्पादन का कुछ हिस्सा हासिल करने की संभावना पर विचार कर रही है। यह जानकारी सूत्रों ने दी।

हैदराबाद की बायोलॉजिकल ई. ने भारतीय बाजार के लिए दिसंबर तक इसके स्वदेशी टीका का करीब 30 करोड़ खुराक बनाने का प्रस्ताव दिया है और सरकार से ‘‘वित्तीय सहयोग’’ की मांग की है। यह वर्तमान में क्लीनिकल परीक्षण के आधे चरण में है।

सूत्रों के मुताबिक जे एंड जे द्वारा अपने टीका को अमेरिका से अन्य देशों में निकट भविष्य में निर्यात करने की सीमित संभावनाएं हैं और भारत के बीई केंद्रों में जुलाई-अगस्त से शुरू हो रहे ‘‘पूरे उत्पादन’’ को समझौते के तहत दवा कंपनी को सौंपा जाएगा।

विदेश मंत्रालय के साथ ही जैव प्रौद्योगिकी विभाग से कहा गया है कि भारतीय बाजार के लिए बीई द्वारा बनाए जा रहे जे एंड जे के टीका का एक हिस्सा हासिल करने पर काम करें। यह जानकारी सूत्रों ने दी।

कोविड-19 की दूसरी लहर के बीच एक अरब से अधिक आबादी के लिए सरकार टीका आपूर्ति के सभी रास्तों की तलाश कर रही है और वैश्विक एवं घरेलू बाजार में टीकों की उपलब्धता को लेकर कैबिनेट सचिव ने पिछले हफ्ते दो दौर की उच्चस्तरीय बैठकें कीं।

क्वाड के सदस्य देशों -- अमेरिका, भारत, जापान और ऑस्ट्रेलिया ने मार्च में डिजिटल शिखर सम्मेलन के दौरान बृहद् टीकाकरण कार्यक्रम शुरू करने का निर्णय किया था।

स्वदेश निर्मित टीका के लिए बायोलॉजिकल ई. ने सरकार से निर्माण के लिए वित्तीय सहयोग की मांग की है। सूत्रों ने बताया कि बायोलॉजिकल ई. के वित्त पोषण के प्रस्तावों पर एक उप समिति ने गौर किया है और स्वास्थ्य मंत्रालय को अपनी अनुशंसा भेजी है।

उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य मंत्रालय से कहा गया है कि बायोलॉजिकल ई. के वित्त पोषण पर तुरंत निर्णय करें।

कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता में की गई उच्चस्तरीय बैठक में विदेश मंत्रालय, नीति आयोग, जैव प्रौद्योगिकी विभाग और स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारी मौजूद थे।