.. राजीव शर्मा ..

एक कहानी है। किसने लिखी, अब याद नहीं। आपको मालूम तो जरूर बताएं ताकि उसके रचनाकार का नाम यहां सम्मान सहित लिख सकूं। कहानी का संदेश बहुत गहरा है।

किसी गांव में बारिश नहीं हुई। लोग बहुत परेशान थे। क्या किया जाए? यह सोच-विचार करते हुए वे गांव से बाहर रहने वाले एक संत के पास गए जिनके बारे में मशहूर था कि अगर वे किसी के लिए प्रार्थना करते हैं तो वह सुनी जाती है, हकीकत में बदल जाती है।

संत ने पूछा, 'क्या हुआ?' लोगों ने पूरी बात बताई। इस पर संत बोले, 'ठीक है, कल आप सब यहां आइए, हम मिलकर प्रार्थना करेंगे। मुझे पूरा भरोसा है कि हमारी प्रार्थना सुनी जाएगी, बारिश होगी।'

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दूसरे दिन पूरा गांव आ गया। हर कोई प्रार्थना करना चाहता था। हर कोई चाहता था कि जैसे ही प्रार्थना संपन्न हो, काली घटाएं उमड़-घुमड़कर आएं और झूमकर बादल बरसें।

लेकिन यह क्या! एक व्यक्ति को छोड़कर सबके हाथ खाली थे। मालूम है उस व्यक्ति के पास क्या था? छाता ... सिर्फ वही अपने साथ छाता लेकर आया क्योंकि उसे पता था कि मेरी प्रार्थना स्वीकार की जाएगी, बारिश होगी तो मुझे छाते की जरूरत होगी।

हमारी भी प्रार्थना सुनी जाएगी, बस इरादा नेक और भरोसा इतना मजबूत होना चाहिए। जिस रिश्ते में इरादा नेक और भरोसा मजबूत नहीं हो, वह टिकता नहीं। प्रार्थना का रिश्ता भी ऐसा ही है। 

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