उत्तर प्रदेश के प्रयागराज शहर से करीब 15 किलोमीटर दूर यमुनापार बसवार गांव में रविवार को लगी चौपाल में स्थानीय लोगों ने पुलिस उत्पीड़न की पीड़ा कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाद्रा से साझा की. पिछली चार फरवरी को बालू के अवैध खनन में लिप्त होने के आरोप में पुलिस ने लोगों को कथित तौर पर पीटा था और उनकी नावें भी तोड़ दी थीं.

वाद्रा ने ट्वीट किया,“ प्रयागराज में पुलिस उत्पीड़न के शिकार निषाद समाज की पीड़ा सुनी और साथ होने का भरोसा दिलाया.” अपने ट्वीट में वाद्रा ने इलाहाबाद में रहने वाले कवि गोविंद निषाद की कविता की चंद पंक्तियां भी साझा कीं. उन्होंने ट्वीट किया, ‘‘निषादों की नदी में, अब बंद होती जा रही है नाव की छपछप, सेतु अब लोगों के बने खेवनहार, घाटों पर खड़े स्टीमर तैयार, कागज पर बालू है उनके हक में, तल पर लेकिन किसी और का क़ब्जा है.’’

चौपाल में मौजूद रामलोचन नामक एक बुजुर्ग व्यक्ति ने कहा, “हमारे पास खेती बाड़ी कुछ नहीं है और इसी नदी पर हमारी रोजी रोटी निर्भर है. कितनी शर्मनाक बात है कि हमारी बहन बेटियों को पुलिसवालों ने पीटा और हमारी नौका भी तोड़ दी.” एक अन्य व्यक्ति ने बताया कि उत्तर प्रदेश में जहां जहां पानी है वहां खनन नहीं हो रहा. जिले में पूरे कछार क्षेत्र में कहीं भी खनन नहीं हो रहा है. लेकिन जब खनन नहीं हो रहा तो तट पर बालू के ढेर कैसे लगे हैं. बड़े लोग अवैध खनन करते हैं और कार्रवाई छोटे लोगों पर होती है. उन्होंने बताया कि पुलिस प्रशासन ने नावें तोड़ी और इसका विरोध करने पर महिलाओं को भी पीटा गया, मवेशी चराने वालों को पीटा गया और यहां तक के मजदूरों को पीटा गया.

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एक महिला ने अपना परिचय दिये बगैर प्रियंका से कहा कि उसके पति को पुलिस ने बांधकर पीटा और जब वह इसका विरोध करने लगी तो उसकी भी पिटाई की गयी . महिला ने कहा कि सरकार इन नावों को ठीक कराए नहीं तो मछुआरा समुदाय भूखों मर जाएगा. टूटी नाव का प्रियंका द्वारा निरीक्षण करने के बाद नाविक राम सुखबिन ने कहा, ‘‘ प्रियंका गांधी के आने से हमें उम्मीद जगी है कि हमारी नाव ठीक करा दी जाएगी. उन्होंने कहा कि प्रियंका गांधी से बातचीत कर बहुत अच्छा लगा.‘‘ एक अन्य नाविक द्वारिका निषाद ने कहा, ‘‘प्रियंका गांधी ने हमारी टूटी नौका देखी. इससे हमें इस बात की उम्मीद है कि जल्द ही हमें घाट का पट्टा भी मिलेगा.’’

प्रियंका गांधी ने चौपाल से लेकर घटनास्थल तक करीब डेढ़ किलोमीटर की पैदल यात्रा की और उनका चेहरा धूल से सन गया था. उनके साथ सैकड़ों की संख्या में स्थानीय लोग घटनास्थल तक गए और जिंदाबाद के नारे लगाए. प्रियंका गांधी ने स्थानीय लड़कियों से भी बातचीत की.

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