अफगानिस्तान पर तालिबान का कब्जा हो चुका है. यहां लोकतांत्रिका व्यवस्था को ध्वस्त कर दिया गया है और तालिबान ने सभी संस्थानों पर अपना कब्जा जमा लिा है. लेकिन इस मुस्लिम बहुल देश में एक समय था जब हिंदू संस्कृति और रिवाजों को माना जाता था. इसका पता इसके इतिहास से चलता है. कभी अफगानिस्तान से भारत का नाता काफी नजदीकी का था. इस इतिहास में महाभारत जो इतिहास में सबसे बड़े युद्ध के रूप में जाना जाता है उसका षड्यंत्र यहीं से शुरू हुआ था.

इतिहास के मुताबिक, कांधार का नाम पहले गांधार हुआ करता था. ये गांधार से कांधार कैसे बना इसके बारे में महाभारत में दिया गया है. 5000 साल पहले राजा सुबल गांधार पर राज करते थे और उनकी पुत्री गांधारी का विवाह हस्तिनापुर के राजकुमार धृतराष्ट्र के साथ हुआ था. गांधारी के एक भाई शकुनि थे जो गांधार के राजा बने. ऐसा कहा जाता है कि भीष्म ने राजा सुबल के पूरे परिवार को नष्ट कर दिया था. इसी का बदला लेने के लिए शकुनि ने कौरव और पांडव के बीच युद्ध कराने की साजिश रची थी.

तालिबान ने पंजशीर को लेकर क्या दावा किया और नॉर्दर्न अलांयस ने उसका क्या जवाब दिया? जानें

इस युद्ध में गांधारी ने अपने 100 पुत्रों को खोए थे जिसके बाद उन्होंने अपने भाई शकुनि को श्राप दिया था कि तुम्हारे राज्य में कभी शांति नहीं रहेगी. हाल में अफगानिस्तान पर तालिबान पर कब्जा होने के बाद इस श्राप की चर्चा शुरू हो गई है.

ऐसा माना जाता है कि पांडवों से हारने के बाद कौरव के सैकड़ों वंशज अफगानिस्तान में आकर बस गए थे. फिर यहां से ईराक और सऊदी अरब में जाकर बस गए थे.  

तालिबान ने कहा- चीन हमारा सबसे महत्वपूर्व पार्टनर है

महाभारत काल की समाप्ति के बाद यहां धीरे-धीरे बौद्ध धर्म का प्रचार-प्रसार होने लगा. एशिया के कुछ भाग में बौद्ध धर्म तेजी से फैलने लगा. भगवान शिव की पूजा यहां धीरे-धीरे समाप्त होने लगी. मुस्लिम शासकों के यहां कब्जा होने से पहले मौर्य शासकों ने यहां राज किया. इसके बाद 11वीं शताब्दी में यहां महमूद गजनवी ने अपनी सत्ता यहां स्थापित की. इसके बाद ही गांधार को कांधार बना दिया गया.

मुल्ला बरादर करेगा अफगानिस्तान की नई सरकार का नेतृत्व, जानें इसके बारे में

#Afghanistan #Mahabharata #India