भारत-चीन सीमा विवाद के बीच महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए भारत ने सोमवार को आगामी मालाबार नौसेना युद्धाभ्यास में अमेरिका और जापान के साथ ऑस्ट्रेलिया के भी हिस्सा लेने की घोषणा की. इसके साथ ही यह चार देशों के समूह ‘क्वॉड’ की सैन्य स्तर पर पहली भागीदारी होगी.

भारत द्वारा ऑस्ट्रेलियाई नौसेना को अगले महीने होने वाले युद्धाभ्यास के लिए आमंत्रित करने का कदम तोक्यो में क्वॉड के विदेश मंत्रियों की हुई गहन बातचीत के दो हफ्ते बाद उठाया गया है. बैठक में मंत्रियों ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग को बढ़ाने के उपायों पर ध्यान केंद्रित किया गया था, जहां पर चीनी सैन्य उपस्थिति और हठधर्मिता लगातार बढ़ रही है.

रक्षा मंत्रालय ने बयान में कहा, ‘‘भारत समुद्री सुरक्षा के क्षेत्र में अन्य देशों के साथ सहयोग बढ़ाना चाहता है और ऑस्ट्रेलिया के साथ रक्षा के क्षेत्र में बढ़ते सहयोग की पृष्ठभूमि में मालाबार-2020 नौसेना युद्धाभ्यास में ऑस्ट्रेलियाई नौसेना की भागीदारी देखने को मिलेगी.’’

बयान में कहा गया कि अभ्यास में हिस्सेदारी स्वतंत्र, मुक्त और समावेशी हिंद-प्रशांत क्षेत्र का सामूहिक समर्थन करता है. यह टिप्पणी भारत के युद्धाभ्यास को लेकर बदले दृष्टिकोण को प्रतिबिंबित करने के साथ ही वृहद संदेश देता है.

इस युद्धाभ्यास के बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में होने की उम्मीद है.

मंत्रालय ने कहा, ‘‘मालाबार युद्धाभ्यास-2020 में शामिल प्रतिभागी समुद्री क्षेत्र में सुरक्षा और संरक्षा को मजबूत करने में सलंग्न हैं. वे सामूहिक रूप से स्वतंत्र, मुक्त और समावेशी हिंद-प्रशांत का समर्थन करते हैं और नियम सम्मत अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को लेकर प्रतिबद्ध हैं.’’

ऑस्ट्रेलिया पिछले कई वर्षों से इस युद्धाभ्यास में शामिल होने को लेकर रुचि दिखा रहा था. हालांकि, भारत ने नौसेना युद्धाभ्यास में शामिल होने के ऑस्ट्रेलियाई अनुरोध को ऐसे समय स्वीकार किया है, जब पूर्वी लद्दाख में चीन के साथ सीमा को लेकर तनाव बढ़ा है.

हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की बढ़ती सैन्य उपस्थिति और आक्रामकता से उत्पन्न परिस्थिति विश्व नेताओं के बीच चर्चा का केंद्र बनी हुई है. अमेरिका, चीन की बढ़ती हठधर्मिता को नियंत्रित करने के लिए ‘क्वॉड’ को एक सुरक्षा ढांचे में तब्दील करने का समर्थक रहा है.

ऑस्ट्रेलियाई रक्षा मंत्री लिंडा रेनॉल्ड सीएसडी ने युद्धाभ्यास में उनके देश की भागीदारी को ‘अहम अवसर’ करार दिया और कहा कि यह हिंद-प्रशांत क्षेत्र के चार प्रमुख लोकतंत्रों के बीच ‘गहरे विश्वास’ और समान सुरक्षा हित के लिए मिलकर काम करने की इच्छाशक्ति को दिखाता है.

रेनॉल्ड ने कहा, ‘‘ मालाबार युद्धाभ्यास जैसे उच्च स्तरीय सैन्य अभ्यास ऑस्ट्रेलियाई समुद्री क्षमता को बढ़ाने, करीबी साझेदारों के साथ पारस्परिकता का निर्माण करने और मुक्त एवं समृद्ध हिंद प्रशांत क्षेत्र के हमारे सामूहिक संकल्प एवं समर्थन को प्रदर्शित करता है.’’

ऑस्ट्रेलिया के विदेश मंत्री मैरिस पेयने ने कहा कि यह घोषणा ऑस्ट्रेलिया के भारत के साथ गहरे होते संबंधों की ओर एक और कदम है. उन्होंने कहा, ‘‘ यह हमारे क्षेत्र में शांति और स्थिरता को बनाए रखने के लिए भारत, ऑस्ट्रेलिया, जापान और अमेरिका की क्षमता को बढ़ाएगा.’’

गौरतलब है कि मालाबार युद्धाभ्यास की शुरुआत वर्ष 1992 में अमेरिकी और भारतीय नौसेना के बीच हिंद महासागर में द्विपक्षीय अभ्यास के तौर पर हुई थी. जापान वर्ष 2015 में इस युद्धाभ्यास का स्थायी प्रतिभागी बना. यह युद्धाभ्यास वर्ष 2018 में फिलीपीन सागर में गुआम तट पर किया गया जबकि वर्ष 2019 में मालाबार अभ्यास का आयोजन जापान के तट पर किया गया.

रक्षा मंत्रालय के बयान में कहा गया कि युद्धाभ्यास की योजना ‘‘समुद्र में बिना संपर्क’ ढांचे के आधार पर तैयार की गई है. मंत्रालय ने कहा, ‘‘इस अभ्यास से इसमें शिरकत करने वाले देशों की नौसेना के बीच समन्वय और मजबूत होगा.’ उल्लेखनीय है कि गत कुछ वर्षों में ऑस्ट्रेलिया और भारत के बीच रक्षा और सुरक्षा संबंध बढ़े हैं.