संयुक्त राज्य अमेरिका के मिनेसोटा राज्य के मिनियापोलिस शहर में 25 मई को एक श्वेत पुलिसकर्मी ने अपनी कस्टडी में एक अश्वेत नागरिक जॉर्ज फ्लॉयड के गले को अपने घुटने से दबाकर उसे मौत के घाट उतार दिया था. इसके बाद अमेरिका में देशव्यापी प्रदर्शन देखने को मिले. खासकर मिनियापोलिस में काफी संख्या में लोग सड़कों पर आ गए. कई जगह प्रदर्शन ने हिंसक रूप ले लिया था, प्रदर्शनकारियों ने नाखुशी जाहिर करने के लिए तोड़-फोड़ और आगजनी का सहारा लिया. ऐसे ही विरोध प्रदर्शन की चपेट में मेनियापोलिस का एक इंडियन रेस्टोरेंट 'गांधी महल' भी आ गया. मेनियापोलिस पुलिस डिपार्टमेंट की बिल्डिंग से महज तीन बिल्डिंग दूर स्थित गांधी महल रेस्टोरेंट को प्रदर्शनकारियों ने आग के हवाले कर दिया था. 

हालांकि रेस्टोरेंट मालिक ने गांधी महल जल जाने के बाद भी प्रदर्शनकारियों पर नाराजगी नहीं जताई और जॉर्ज फ्लॉयड के लिए इंसाफ की मांग की. इस इंडियन रेस्टोरेंट के मालिक मूल रूप से बांग्लादेशी हैं. एक वायरल फेसबुक पोस्ट में रेस्टोरेंट मालिक की बेटी हफ्सा ने लिखा, "यह दुखद है कि गांधी महल में आग लगी और उसमें नुकसान हुआ है. हालांकि, हम उम्मीद नहीं छोड़ेंगे. मैं अपने पड़ोसियों की आभारी हूं जिन्होंने गांधी महल को बचाने के लिए हरसंभव प्रयास किया. आपकी कोशिशों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. हमारे लिए चिंतित नहीं हों, हम इसे दोबारा बनाएंगे और इससे उबरेंगे." हफ्सा ने आगे लिखा, "मैं अपने पिता के पास बैठी हूं और समाचार देख रही हूं. मैंने उन्हें फोन पर यह कहते हुए सुना कि इमारत को जल जाने दो लेकिन न्याय मिलना चाहिए, उन अधिकारियों को जेल में डालो. गांधी महल ने शायद आंच महसूस की है लेकिन हमारे समुदाय की मदद, रक्षा और साथ खड़े होने की हमारी आग कभी शांत नहीं होगी."

इस सोच के चलते गांधी महल रेस्टोरेंट चलाने वाले परिवार की काफी तारीफ हुई. अमेरिकी न्यूज में भी ये रेस्टोरेंट छाया रहा.

गांधी महल और उसको चलाने वाले बांग्लादेशी परिवार का परिचय

गांधी महल, मिनियापोलिस में लेक स्ट्रीट पर स्थित है, लेकिन इसकी 7,000 वर्ग फुट की बिल्डिंग के अंदर खाना सर्व करने के अलावा भी कई काम होते हैं. गांधी महल रेस्टो7रेंट को बांग्ला देश मूल के तीन भाइयों ने मिलकर शुरू किया था. गांधी महल के प्रेसिडेंट और शेफ रुहेल इस्ला्म कहते हैं कि हमने अपने ऊपर भरोसा किया और ये रेस्टोेरेंट शुरू किया. आज ये पूरी तरह से फायदे का कारोबार बन चुका है. इस बिल्डिंग के मेन फ्लोर के साथ ही छत पर भी कई काम किए जाते हैं. रुहेल इस्लाकम मेनियापोलिस के उन चंद कारोबारियों में हैं, जिन्हेंा बिजनेस जर्नल के कवर पेज पर जगह मिल चुकी है. उन्हेंन लेक स्ट्रीकट का पावर प्लेेयर भी कहा जाता है.

गांधी महल बिल्डिंग में रेस्टोहरेंट के साथ ही होता है ये सब भी

रुहेल इस्लािम और उनके परिवार ने सबसे पहले अपने भाइयों के साथ मिलकर 2005 में यूनिवर्सिटी ऑफ मिनिसोटा के नजदीक डिंकीटाउन में रेस्टोेरेंट शुरू किया था. इसके बाद 2009 में इस परिवार ने अपने कारेाबार को लेक स्ट्रीाट पर शुरू किया. पिछले कुछ साल में रुहेल इस्ला0म के परिवार ने 27 एवेन्यु और लेक स्ट्रीट की अपनी बिल्डिंग के बेसमेंट को फूड स्टोरेज एरिया में बदल दिया. इसके अलावा उन्होंने वहीं एक गार्डन में मसाले और हर्ब्सं उगाने शुरू कर दिए.

साथ ही एक फिश फार्म भी खोल दिया. परिवार रेस्टोरेंट की छत पर मधुमक्खी पालन भी करता है. इसके अलावा गांधी महल बिल्डिंग की बिजली की जरूरत को पूरा करने के लिए छत पर सोलर पैनल भी लगाए गए हैं. लेक स्ट्रीट से कुछ कदम की दूरी पर इस परिवार ने एक कम्युनिटी गार्डन शुरू किया है, जिसमें सब्जियां और फल पैदा किए जाते हैं.