प्रयागराज, 26 मई (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने गौतम बुद्ध नगर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को शिखा गौतम की पेशी के संबंध में जारी आदेश का अनुपालन करने का निर्देश दिया है। शिखा गौतम, अजय सिरोही की कानूनी रूप से विवाहित पत्नी है और उसे उसके मां बाप ने घर में कैद कर रखा है।

न्यायमूर्ति शेखर कुमार यादव ने शिखा और उसके पति द्वारा दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया।

याचिकाकर्ताओं के वकील ने दलील दी कि शिखा की आयु 25 वर्ष, जबकि अजय की आयु 26 वर्ष है और दोनों वयस्क हैं। उन्होंने केहा कि दोनों ने 15 जनवरी, 2016 को आर्य समाज मंदिर में शादी की और उसी दिन अपने विवाह का पंजीकरण गाजियाबाद में रजिस्ट्रार के समक्ष कराया।

उन्होंने बताया कि दोनों पति पत्नी अपने घर में खुशी से रह रहे थे, लेकिन 7 अक्टूबर, 2020 को शिखा के माता पिता, भाई और रिश्तेदार उसके घर आए और उसे अपने घर ले जाकर उसकी पिटाई शुरू कर दी और कमरे में बंद कर दिया।

अधिवक्ता ने बताया कि उन्होंने शिखा का मोबाइल फोन भी छीन लिया। हालांकि शिखा किसी तरह अपने पति को व्हाट्सऐप पर अपनी स्थिति के बारे में संदेश भेजने में सफल रही जिसके बाद अजय दादरी पुलिस थाने गया, लेकिन पुलिस ने शिखा को मुक्त कराने के लिए कुछ नहीं किया।

अदालत ने याचिकाकर्ता अजय के वकील को शिखा के पक्ष में 15,000 रुपये का डिमांड ड्राफ्ट इस अदालत के महानिबंधक कार्यालय में जमा करने को कहा और इस डिमांड ड्राफ्ट के जमा करने के बाद ही प्रतिवादियों को नोटिस जारी की जाएगी।

अदालत ने दोनों याचिकाकर्ताओं को सुनवाई की अगली तारीख 17 जून को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने का निर्देश दिया। यह निर्णय 20 मई को सुनाया गया।