जम्मू, 23 मई (भाषा) यहां की एक अदालत ने अवैध रूप से देश में आए दो रोहिंग्या को जमानत देने से यह कहते हुए इनकार कर दिया कि उन्हें रिहा करने से कानून व्यवस्था की समस्या हो सकती है।

दोनों को दो महीने पहले गिरफ्तार किया गया था।

अदालत ने कहा कि इस आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता कि आरोपी आतंकवादी सहित आपराधिक गतिविधियों में शामिल हो सकते हैं।

आरोपी अशिकुर रहमान और अब्दुल गफूर बठिंडी इलाके में रहते थे और उन्हें मार्च महीने में गैर कानूनी तरीके से रह रहे रोहिंग्या मुसलमानों के सत्यापन के अभियान के दौरान तब गिरफ्तार किया गया जब उनके पास से फर्जी तरीके से बनवाए गए भारतीय नागरिकता के कई दस्तावेज प्राप्त हुए।

जम्मू के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश किशोर कुमार ने शनिवार को रहमान और गफूर की जमानत अर्जी खारिज करते हुए कहा कि यह बहुत आश्चर्यजनक है कि आरोपियों द्वारा खुद को भारतीय नागरिक साबित करने के लिए बड़े पैमाने पर फर्जी दस्तावेज बनवाए गए।

अदालत ने कहा, ‘‘आरोपी बेहद गंभीर अपराध में शामिल हैं...ऐसा लगता है कि इस तरह के दस्तावेज आरोपियों और अन्य लोग जिन्हें इसकी जरूरत है, उन्हें मुहैया कराने और बनाने के लिए स्थापित गिरोह है।’’

अदालत ने कहा, ‘‘आरोपी पुलिस हिरासत में हैं और उनकी रिहाई से कानून व्यवस्था की समस्या उत्पन्न हो सकती है।’’

अदालत ने कहा कि इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है कि आरोपी आतंकवादी गतिविधियों सहित अन्य आपराधिक गतिविधियों में शामिल हो सकते हैं।

न्यायाधीश ने कहा,‘‘इस तरह के लोग अपनी रिहाई के हकदार नहीं है क्योंकि इससे प्रशासन के लिए कानून व्यवस्था की समस्या उत्पन्न हो सकती है। कानून के तहत सरकार की अनुमति लिए बिना किसी भी व्यक्ति को अवैध रूप से भारत में रहने की अनुमति नहीं दी जा सकती।’’