श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पूरे देश में 30 अगस्त दिन सोमवार को मनाया जाएगा. हर ओर इसकी खास तैयारियां भी होने लगी हैं. लोगों में इससे जुड़ी मान्यताएं, किस्से और कहानियां जानना चाहते हैं और पूजा के दौरान खीरे का उपयोग क्यों होता है यह सबसे अहम सवाल होता है. हिंदू धर्म के अनुयायिों में जन्माष्टमी का खास मतलब होता है  और ऐसा बताया जा रहा है कि इस बार करीब 101 सालों के बाद महा संयोग बना है और 27 सालों के बाद जयंती का योग भी बन रहा है.

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ऐसे संयोग में भगवान कृष्ण की विधि-विधान से पूजा करने से उनकी विशेष कृपा होती है. भगवान कृष्ण के जन्म पर खीरे की पूजा का क्या महत्व होता है इसके बारे में आपको जरूर जानना चाहिए.  

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खीरे के बिना क्यों अधूरी है श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की पूजा?

हिंदू धर्म के अनुसार ऐसी मान्यता है कि खीरे से भगवान श्री कृष्ण बहुत खुश रहते हैं. खीरा चढ़ाने से नंदलाल भक्तों के सभी कष्टों को हर लेते हैं. जन्माष्टमी की पूजा में उस खीरे का उपयोग होता है जिसमें डंठल और हल्की पत्तियां होती हैं. दूसरी मान्यता के अनुसार, जब बच्चा पैदा होता है तब उसको मां से अलग करने के लिए गर्भनाल को काटा जाता है. ठीक उसी प्रकार खीरे के डंठल को भी काटा जाता है. यह भगवान श्री कृष्ण को मां देवकी से अलग करने का प्रतीक समझा जाता है. यह करने के बाद ही श्री कृष्ण जन्माष्टमी की पूजा शुरू होती है.

डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य जानकारी के आधार पर लिखा है. इसकी पुष्टि Opoyi Hindi नहीं करता है. इसपर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञों से राय जरूर लें.

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