नयी दिल्ली 23 मई (भाषा) जेपी इंफ्राटेक लिमिटेड (जेआईएल) दिवाला मामले में ऋणदाताओं की समिति (सीओसी) सरकारी कंपनी एनबीसीसी के विरोध पत्र पर सोमवार 24 माई को सुबह चर्चा करेगी। यह चर्चा सुरक्षा समूह के प्रस्ताव पर वित्तीय ऋणदाताओं के बीच मतदान कराए जाने से पहले की जायेगी।

इससे पहले 20 मई को सीओसी ने सुरक्षा समूह के प्रस्ताव पर मुहर लगाते हुए एनबीसीसी के प्रस्ताव को खारिज कर दिया था। जिसके बाद एनबीसीसी ने जेआईएल के अंतरिम समाधान पेशेवर (आईआरपी) के अधिकार क्षेत्र पर सवाल उठाते हुए कानूनी कदम उठाने की धमकी दी थी।

सूत्रों के अनुसार ऋणदाता समिति की बैठक सोमवार दस बजे होगी उसमें एनबीसीसी के पत्र पर चर्चा की जायेगी।

सुरक्षा समूह के प्रस्ताव पर मतदान 24 मई को दोपहर में शुरू होगा और बृहस्तपतिवार शाम पांच बजे तक चलेगा।

जेपी इंफ्राटेक की रिणदाता समिति ने दरअसल बीस मई को बैठक में एनबीसीसी के प्रस्ताव को दिवाला कानून के कुछ प्रावधानों के अनुरूप नहीं पाए जाने का हवाले देकर खारिज कर दिया था।

इस निर्णय से नाराज एनबीसीसी ने 22 मई को लिख पत्र में आईआरपी अनुज जैन के अधिकार क्षेत्र पर सवाल उठाते हुये ऋणदाताओं द्वारा उठाए गए प्रश्नों पर और स्पष्टीकरण देने के लिए 14-पृष्ठ का पत्र भेजा है।

सूत्रों ने अनुसार एनबीसीसी के इस पत्र के बाद अनुज जैन ने ऋणदाता समिति के सदस्यों से रविवार को बातचीत की। जिसमे पांच ऋणदाता एसबीआई, आईएफसीएल, आईडीबीआई, यूबीआई और एलआईसी ने उनसे इस संबंध में बैठक बुलाने का आग्रह किया है।

सूत्रों ने कहा कि ऋणदाता समिति की अगली बैठक में एनबीसीसी के प्रस्ताव, प्रस्ताव योजना के लिए परिशिष्ट और कॉर्पोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया में अगले कदम को लेकर चर्चा की जायेगी।

सूत्रों ने बताया कि कई बैंक ऋणदाता समिति की अगली बैठक बुलाने के पक्ष में है जबकि कई जबकि घर खरीदारों के एक वर्ग ने आईआरपी से एनबीसीसी के प्रस्ताव पर विचार नहीं किया जाने की बात कही है।

गौरतलब है किआईडीबीआई बैंक के नेतृत्व वाले बैंकों के समूह के एक आवेदन पर जेपी इंफ्राटेक के मामले का राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण ने अगस्त 2017 में रिण समाधान प्रक्रिया में डाल दिया था।

भाषा जतिन मनोहर

मनोहर