रांची, 22 मई (भाषा) झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग ने ग्रामीण क्षेत्रों में घर-घर जाकर सर्वेक्षण की तैयारी शुरू कर दी है।

राज्य सरकार के प्रवक्ता ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग ने विशेष रूप से राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में संभावित कोविड के मामलों की पहचान करने के लिए घर-घर जाकर सर्वेक्षण करने के निर्देशों पर कार्रवाई करते हुए सभी उपायुक्तों को अभियान की विस्तृत योजना के संबंध में पत्र जारी किया है।

राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन, झारखंड को रेपिड एंटीजेन जांच और लक्षणों के आधार पर संभावित कोविड रोगियों की पहचान के लिए अग्रिम मोर्चे के कार्यकर्ताओं के प्रशिक्षण की जिम्मेदारी दी गई है।

प्रवक्ता ने बताया कि झारखंड के तीन करोड़ से अधिक लोगों की कोरोना से सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सखी मंडल की दीदी सहित हजारों स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं का इस उद्देश्य से प्रशिक्षण कार्यक्रम 21 मई को प्रारंभ कर दिया गया है। प्रशिक्षण राज्य के हर ब्लॉक में आयोजित किया गया है। प्रखंड प्रशिक्षण दल द्वारा एएनएम, सीएचओ, एमपीडब्ल्यू और सहिया दीदी को प्रशिक्षित किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि परीक्षण प्रारूप के अलावा इन कार्यकर्ताओं को ऑक्सीमीटर परिणाम तापमान और अन्य संबंधित लक्षणों को पढ़ने के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है। यह संभावित संक्रमित रोगी की पहचान करने में मदद करेगा, जिसे बाद में कोविड-19 परीक्षण के लिए परीक्षण केंद्रों में भेजा जा सकता है।

प्रवक्ता ने बताया कि घर-घर जाकर होने वाले इस सर्वेक्षण के दौरान अग्रिम मोर्चे के कार्यकर्ताओं की टीम संबंधित पंचायत के हर घर का दौरा करेगी।

इस दौरान किसी घर में कोई भी संक्रमण मामला, पिछले दो महीनों में किसी की भी मौत या कोविड लक्षणों वाले व्यक्ति की पहचान के लिए हर घर का सर्वेक्षण किया जाएगा। यदि परिवार का कोई सदस्य संक्रमित पाया जाता है, तो टीम यह सुनिश्चित करेगी कि परिवार के अन्य सदस्यों का भी परीक्षण हो। इसके लिए एक परीक्षण केंद्र भी काम करेगा। अगर किसी में कोविड के लक्षण पाए जाते हैं, तो उन्हें जल्द से जल्द परीक्षण के लिए ले जाया जाएगा। प्रत्येक पंचायत में एक पृथक-वास केंद्र भी संचालित होगा।

भाषा, इन्दु, शफीक