.. राजीव शर्मा ..

अभिनेत्री करीना कपूर (Kareena Kapoor) ने बेटे को जन्म दिया है। परिवार में खुशियों का माहौल है, जैसा कि आमतौर पर होता ही है। बच्चे का नाम क्या होगा, इस बारे में परिवार द्वारा कोई जानकारी नहीं दी गई है लेकिन ट्विटर पर कुछ लोग 'पराई पंचायती' में बेवजह टांग अड़ा रहे हैं। वे करीना कपूर को सुझाव दे रहे हैं कि बच्चे का क्या नाम रखें।

ये सुझाव इसलिए नहीं दिए जा रहे कि वे करीना के हितैषी हैं, बल्कि इनमें व्यंग्य की मात्रा ज्यादा है। उन्हें बताया जा रहा है कि बेटे का नाम या तो ओसामा रखें या औरंगजेब, चूंकि उन्होंने पहले बेटे का नाम तैमूर रखा था।

वैसे तो करीना और सैफ अली खान के परिवार की इच्छा पर निर्भर करता है कि वे अपने बेटे का क्या नाम रखते हैं। न दुनिया को इससे कोई फर्क पड़ता है कि कोई अपने बच्चे का क्या नाम रखता है। क्या नाम का उसके व्यक्तित्व पर प्रभाव पड़ता है? मैंने अब तक जितने ऐसे लोगों को देखा है, जिनका नामकरण किसी चर्चित नाम से किया गया, कभी नहीं पाया कि उनका व्यक्तित्व उससे प्रभावित हुआ हो।  

मेरी एक सहपाठी का नाम सरस्वती था, जो हर टेस्ट में फेल होती थी। हमारे घर के पास लोहा सिंह नामक दर्जी की दुकान थी। उस बेचारे का लोहा कोई नहीं मानता था, उसकी बीवी ही उसे फटकार देती थी।

शेर सिंह नामक दूध वाला सिर्फ नाम का शेर था। यह और बात है कि वह बिल्ली से डर जाता था। मेरे एक सहकर्मी का नाम जालिम सिंह है, उनसे ज्यादा रहमदिल मैंने किसी को नहीं देखा। स्कूल में सुभाष नामक सहपाठी की एक दिन इस बात पर पिटाई हो गई कि वह राष्ट्रगान के समय इधर-उधर झांक रहा था।

आटा चक्की चलाने वाले भगत सिंह को यह भी नहीं पता था कि स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस में क्या अंतर है। सोसाइटी का चौकीदार ज्ञानचंद नहीं जानता कि वेद कितने हैं और शास्त्रों में आत्मा के बारे में क्या लिखा गया है। वह सीधा-सादा आदमी है जिसका ​किताबों से दूर-दूर तक कोई लेनादेना नहीं है।  

कई दिनों तक स्कूल न आने वाले बलराम के बारे में मालूम हुआ कि उसे कमजोरी के कारण चक्कर आ रहे थे, लिहाजा उसके पिताजी डॉक्टर के पास लेकर गए हैं। राजस्थान में रावण सिंह नाम वाले बहुत लोग मिल जाएंगे। उनमें से शायद ही किसी ने अपहरण किया हो।

नौवीं कक्षा में एक पाठ शहीद मेजर शैतान सिंह पर था, जो 1962 के युद्ध में वीरगति को प्राप्त हुए थे। उनसे बढ़कर संत कौन होगा!  

उस माधुरी ('तू शायर है, मैं तेरी शायरी' वाली माधुरी दीक्षित नहीं) को नहीं भूल सकता जो मधुर बोलना जानती ही नहीं थी। जब कभी बच्चे चुपके से उसके बगीचे से बेर तोड़ने जाते तो वह डंडा लेकर पीटने को दौड़ती।

सद्दाम हुसैन इराक के पूर्व राष्ट्रपति रहे हैं। उनकी बड़ी धाक थी लेकिन हमारे कस्बे में सद्दाम हुसैन नामक एक युवक गधागाड़ी चलाया करता था।

ज्यादा दूर क्यों जाऊं, मेरा ही उदाहरण दे देता हूं। हमारे पूर्व प्रधानमंत्री का नाम राजीव रहा है जो बहुत प्रसिद्ध थे, देश-विदेश घूमे थे। वहीं, मेरे मोहल्ले में ही मुझे जानने वाले लोग बहुत कम हैं। विदेश तो छोड़िए, मैं झुमरीतलैया भी नहीं गया! इसलिए कोई मां-बाप अपने बच्चे का क्या नाम रखते हैं, यह उन पर छोड़ देना चाहिए। अगर वे आपको पसंद नहीं तो उनकी फिल्में न देखें।

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