बेंगलुरू, 26 मई (भाषा) कर्नाटक के मुख्यमंत्री बी एस येदियुरप्पा ने बृहस्पतिवार को एक बैठक बुलाई है जिसमें कावेरी नदी पर बांध बनाने के प्रस्तावित स्थान मेकेदातू में नियमों के कथित उल्लंघन पर राष्ट्रीय हरित अधिकरण द्वारा पैनल गठित किए जाने के खिलाफ कानूनी कार्रवाई पर निर्णय लिया जाएगा।

राज्य सरकार ने एनजीटी के निर्णय की वैधता और उसके वक्त पर प्रश्न उठाया है क्योंकि प्रस्तावित परियोजना से जुड़ा मामला उच्चतम न्यायालय में विचाराधीन है।

गृह एवं कानून मंत्री बसवराज बोम्मई ने बुधवार को यहां संवाददाताओं से कहा,‘‘समाचार पत्रों की खबरों के आधार पर राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने चेन्नई में स्वत: संज्ञान लेते हुए एक समिति गठित की है और उसके सदस्यों से मेकेदातू की यात्रा करके यह पता लगाने को कहा है कि कहीं कोई उल्लंघन हुआ है या पर्यावरण संबंधी को मुद्दा तो नहीं है....क्योंकि औपचारिक तौर पर कोई शिकायत दाखिल नहीं की गई है।’’

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने बैठक बुलाई है ताकि अगले कदम के बारे में निर्णय लिया जा सके।

गौरतलब है कि एनजीटी ने मंगलवार को एक समिति गठित की है और उसे प्रस्तावित निर्माण स्थल पर नियमों के कथित उल्लंघन पर रिपोर्ट पेश करने को कहा है।

दरअसल समाचार पत्र में एक खबर प्रकाशित हुई थी कि कर्नाटक सरकार ने कावेरी नदी पर बांध बनाने का प्रस्ताव पेश किया है, लेकिन पूर्व में तमिलनाडु सरकार ने मामला उच्चतम न्यायालय के समक्ष लंबित होने की बात कहते हुए इसका घोर विरोध किया था जिसके बाद कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकार ने दो बार इसे खारिज कर दिया था।

बोम्मई ने कहा कि मेकेदातू परियोजना कर्नाटक का अधिकार है और उसके विरोध में तमिलनाडु सरकार उच्चतम न्यायालय पहुंची है। उन्होंने कहा कि मामला उच्चतम न्यायालय में है और इस परियोजना से संबंधित पूरा ब्योरा उनके पास है।

मेकेदातू एक बहुउद्देशीय (पेयजल और बिजली) परियोजना है, जिसमें रामनगर जिले के कनकपुरा में एक बांध बनाया जाना शामिल है।

तमिलनाडु इस परियोजना का यह कहते हुए विरोध कर रहा है कि बांध बनने के बाद राज्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।