प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी मंगलवार को उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में राजा महेंद्र प्रताप सिंह राज्य विश्वविद्यालय की आधारशिला रखेंगे. इसके बाद पीएम का संबोधन होगा और वह अलीगढ़ नोड के उत्तर प्रदेश रक्षा औद्योगिक गलियारे और विश्वविद्यालय के प्रदर्शनी मॉडल का भी दौरा करेंगे. 

यूपी की योगी आदित्यनाथ सरकार ने सितंबर 2019 में अलीगढ़ में राजा महेंद्र प्रताप सिंह के नाम पर राज्य स्तरीय यूनिवर्सिटी खोलने की घोषणा की थी. अब ये वादा साकार हो रहा है. राजा महेंद्र प्रताप सिंह एक स्वतंत्रता सेनानी, शिक्षाविद और समाज सुधारक थे. 

विश्वविद्यालय की स्थापना अलीगढ़ की कोल तहसील के लोढ़ा और मुसेपुर करीम जरौली गांव में 92 एकड़ में फैले क्षेत्र में की जा रही है. पीएमओ ने कहा कि यह अलीगढ़ संभाग के 395 कॉलेजों को संबद्धता प्रदान करेगा.

विख्यात जाट शख्सियत के नाम पर विश्वविद्यालय स्थापित करने के सरकार के फैसले को राजनीतिक रूप से अगले साल की शुरुआत में होने वाले यूपी विधानसभा चुनावों से जोड़कर देखा जा रहा है. इसे सत्तारूढ़ बीजेपी की जाट समुदाय को अपनी तरफ लाने की कोशिश मानी जा रही है. 

राजा महेंद्र प्रताप थे कौन?

राजा महेंद्र प्रताप सिंह वेस्टर्न यूपी के हाथरस जिले के मुरसान रियासत के राजा थे. जाट समुदाय से आने वाले राजा महेंद्र अपने इलाके के काफी पढ़े-लिखे शख्स तो थे ही,  साथ ही वह एक लेखक और पत्रकार भी रहे. पहले विश्वयुद्ध के दौरान अफगानिस्तान जाकर उन्होंने भारत की पहली निर्वासित सरकार बनाई. वे इस निर्वासित सरकार के राष्ट्रपति थे. एक दिसंबर, 1915 को राजा महेंद्र प्रताप सिंह ने अफगानिस्तान में पहली निर्वासित सरकार की घोषणा की थी.

निर्वासित सरकार का मतलब यह है कि अंग्रेजों के शासन के दौरान स्वतंत्र भारतीय सरकार की घोषणा. वैसे ही काम, जैसा सुभाष चंद्र बोस ने बाद में किया था. हालांकि सुभाष चंद्र बोस कांग्रेसी थे, जबकि राजा महेंद्र प्रताप सिंह कांग्रेस के सदस्य नहीं थे.

सुभाष चंद्र बोस निर्वासित सरकार के गठन के बाद भारत नहीं लौट सके थे, लेकिन राजा महेंद्र प्रताप सिंह भारत भी लौटे और आजादी के बाद राजनीति में भी सक्रिय रहे. राजा महेंद्र प्रताप सिंह 32 वर्षों तक देश से बाहर रहे और भारत को आजाद कराने की कोशिश में जर्मनी, रूस और जापान जैसे देशों से मदद की गुहार भी लगाईं. हालांकि वह इसमें अधिक कामयाबी हासिल नहीं कर सके. 

राजा महेंद्र प्रताप सिंह ने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) को 1929 में 3.8 एकड़ की जमीन लीज पर दी थी. इस जमीन के आधे हिस्से में सिटी स्कूल चल रहा है और आधा हिस्सा अभी खाली है.

महेंद्र प्रताप सिंह 1946 में भारत लौटे और भारत लौटकर उन्होंने सबसे पहले वर्धा जाकर महात्मा गांधी से मुलाकात की. आजादी के बाद बनने वाली कांग्रेस सरकारों में उन्हें कोई अहम जिम्मेदारी निभाने का मौका नहीं मिला.  

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बता दें कि शांति-सद्भाव और शिक्षा के लिए कोशिशों को देखते हुए राजा महेंद्र प्रताप सिंह को 1932 में शांति के नोबल पुरस्कार के लिए नामांकित किया गया था.  राजा महेंद्र प्रताप सिंह को 'आर्यन पेशवा' के नाम से भी जाना जाता था. वह भारतीय स्वतंत्रता सेनानी संघ के अध्यक्ष थे और अखिल भारतीय जाट महासभा के अध्यक्ष भी थे.

राजा महेंद्र प्रताप सिंह 1957-1962 में दूसरी लोकसभा के सदस्य रहे. वह 1957 के लोकसभा चुनाव में मथुरा लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र से भारतीय जनसंघ के उम्मीदवार और भारत के भावी प्रधान मंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को हराकर एक स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में चुने गए. वाजपेयी पांच उम्मीदवारों की सूची में चौथे स्थान पर रहे थे.

उन्होंने कॉलेज में पढ़ते समय 1902 में हरियाणा (तब पंजाब में) की एक रियासत, जींद के सत्तारूढ़ सिद्धू जाट परिवार की बलवीर कौर से शादी की थी. 1979 में उनका निधन हो गया.

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