अफगानिस्तान में सत्ता संभालने के बाद के दिनों में तालिबान के कई आंकड़े काबुल में प्रवेश कर चुके हैं. तालिबान के सियासी दलों में भी बड़ा बदलाव देखा गया है. ऐसे में ये जानना बहुत जरूरी है कि आखिर तालिबान की बागडोर किस के हाथों में हैं. आइए जानते है तालिबान के उन प्रमुख नेताओं और इकाइयों के बारे में जो तालिबान को संभाल रहे हैं.

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मौलवी हिबतुल्लाह अखुंदजादा (Hibatullah Akhundzada)

तालिबान के सबसे बड़े नेता हिबतुल्लाह अखुंदज़ादा (मुल्ला उमर) के पद का नाम है - अमीर अल-मुमिनिन. इसका अर्थ है - तालिबान के वफादारों का कमांडर. 1990 में तालिबान की स्थापना के बाद मुल्ला उमर ने यह उपाधि हासिल की.

रहबरी शूरा

हिबतुल्लाह अखुंदज़ादा तालिबान की परिषद रहबारी शूरा के प्रमुख हैं. यह परिषद पाकिस्तान के बलूचिस्तान के क्वेटा शहर से काम करती है. इसे 'क्वेटा शूरा' के नाम से भी जाना जाता है. क्वेटा शूरा की मंजूरी मिलने के बाद ही कोई फैसला मान्य होता है.

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प्रशासनिक इकाइयां-

रहबारी शूरा के तहत 17 आयोग हैं, जो तालिबान सरकार चलाने में मदद करते हैं. आप इसे एक मंत्रालय मान सकते हैं. ये सेना, अर्थव्यवस्था, शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य मामलों के लिए नीतियां निर्धारित करते हैं.

मुल्ला बरादर (Abdul Ghani Baradar)

मुल्ला बरादार का नाम पहले अब्दुल गनी अखुंद था. मुल्ला उमर ने उन्हें बरादर उपनाम दिया. वह तालिबान के सह-संस्थापक हैं. मुल्ला बरादर ने मुल्ला उमर के सहयोगी के रूप में काम किया. मुल्ला बरादर वर्तमान में तालिबान के राजनीतिक मामलों के प्रमुख हैं. अमेरिका के साथ शांति समझौते को लेकर दोहा में बातचीत हुई और इसका नेतृत्व बरादर ने किया. अमेरिका-तालिबान वार्ता से 8 साल पहले उन्हें पाकिस्तान की जेल से रिहा किया गया था.

मुल्ला मुहम्मद याकूब (Mohammad Yaqoob)

तालिबान सैन्य कमांडर. याकूब तालिबान के वैचारिक और धार्मिक मामलों के लिए भी जिम्मेदार है. तालिबान में याकूब की छवि एक उदार व्यक्ति के रूप में है. याकूब को अमेरिका के साथ समझौते की शर्तों को लागू करने का श्रेय भी जाता है.

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सिराजुद्दीन हक्कानी (Sirajuddin Haqqani)

सिराजुद्दीन हक्कानी नेटवर्क का मुखिया है. कई अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों ने हक्कानी नेटवर्क को आतंकवादी संगठन घोषित कर दिया है. तालिबान में सिराजुद्दीन हक्कानी उग्रवाद से संबंधित मामलों की देखरेख करता है. तालिबान शासन के खिलाफ विरोध की आवाजों से निपटना उनकी जिम्मेदारी है.

गैर-पश्तून तालिबान

तालिबान के शीर्ष नेतृत्व पर पश्तूनों का वर्चस्व है, लेकिन कई नेता अन्य समुदायों से भी हैं. तालिबान सरकार में पूर्व गवर्नर कारी दीन मोहम्मद ताजिक उज़्बेक हैं, जबकि मौलवी अब्दुल सलाम हनफ़ी उज़्बेक हैं. दोनों नेता दोहा में अमेरिका के साथ बातचीत करने वाली टीम का भी हिस्सा थे.

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