पंचांग के अनुसार सावन का महीना सबसे अधिक महत्व रखता है. यह धार्मिक और वैज्ञानिक रूप से वर्ष के सबसे महत्वपूर्ण महीनों में से एक माना जाता है. यह आम तौर पर जुलाई और अगस्त के बीच में पड़ता है और भगवान शिव को समर्पित है, यह एक बड़ा कारण है कि भक्त इस अवधि के दौरान उपवास रखते हैं और कुछ नियमों का पालन करते हैं. लोग भगवान शिव को प्रभावित करने और उपयुक्त जीवनसाथी पाने के लिए सावन के महीने में उपवास रखते हैं. सोमवार को भक्त जल्दी स्नान करते हैं और सुबह और सूर्यास्त के बाद पूजा करने के लिए मंदिर जाते हैं. सावन के पूरे महीने में भगवान शिव की कृतज्ञता के भाव के रूप में पूजा की जाती है.

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धार्मिक ग्रंथों में भी सावन मास का महत्व बताया गया है. श्रावण मास में भगवान शिव और उनके परिवार की विधिपूर्वक पूजा करने का विधान है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन के महीने में भगवान शिव का अभिषेक करना बहुत फलदायी होता है, इसलिए लोग सावन में रुद्राभिषेक करते हैं. सावन का महीना शिव की पूजा के लिए सबसे अच्छा महीना माना जाता है.

कहा जाता है कि इस महीने में भगवान शिव की पूजा करने से वह जल्दी प्रसन्न होते हैं और भक्तों की मनोकामना पूरी करते हैं. वह उन्हें धन, सम्मान और पद की प्राप्ति का आशीर्वाद देते हैं. इसके साथ ही सोमवार के व्रत का फल तत्काल फलदायी होता है. ऐसा माना जाता है कि सावन के महीने में भगवान शंकर की पूजा करने से विवाह आदि में सभी प्रकार की परेशानियां दूर हो जाती हैं. जिन लोगों पर शनि का दोष होता है, उनका शनि दोष समाप्त हो जाता है.

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सावन महीने के सोमवार

सावन के महीने में सोमवार के दिन का खास महत्व होता है. इस बार सावन के चार सोमवार व्रत पड़ रहे हैं.सोमवार का पहला व्रत 26 जुलाई को है जबकि इसका आखिरी सोमवार 16 अगस्त को है. सावन के हर सोमवार में बेल पत्र से भगवान भोलेनाथ की विशेष पूजा की जाती है.

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नोटः ये लेख मान्यताओं के आधार पर बनाए गए हैं. ओपोई इस बारे में किसी भी बातों की पुष्टि नहीं करता है.