गुलामी की जंजीरों को तोड़ने और मुगलों पर मराठा ध्वजा फरहाने वाले छत्रति शिवाजी महाराज ने मराठा साम्राज्य खड़ा किया था. इन्होंने बहादुरी, बुद्धिमानी, शौर्य और दयालुता के कारण अपनी पहचान लोकप्रिय राजा के रूप में बनाई. शिवाजी महाराज भारत माता के लिए अपना जीवन न्यौछावर करने वाले वीर थे जिन्होंने मुगलों से भारत में रहने वाले हिंदुओं की रक्षा की. छत्रपति शिवाजी महाराज की आज जयंती है और इस मौके पर हम आपको उनसे जुड़ी 10 बातें बताएंगे.

शिवाजी महाराज से जुड़ा 10 रोचक इतिहास
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मराठा साम्राज्य के सबसे पहले छत्रपति शिवाजी महाराज का जन्म 19 फरवरी, 1630 को शिवनेरी दुर्ग पुणे में हुआ था. मगर कुछ जगह उनके जन्मतिथि को 6 अप्रैल, 1627 दर्ज है.
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शिवाजी के पिता शहा जी भोसले और माता जीजाबाई थीं. शिवाजी के जन्म के समय दिल्ली की गद्दी पर शाहजहां बैठा था और दक्कन में तीन प्रदेश अहमनगर में निजामशाही, बीजापुर में आदिलशाही और गोलकुंडा में कुतुबशाही का शासन चल रहा था.
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15 साल की उम्र में शिवाजी ने अपना पहला युद्ध लड़ा था, जो तोरना किले में हमला करके जीत लिया था. इसके बाद शिवाजी ने कोंडाना और राजगढ़ किले में तीज हासिल की.
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शिवाजी जैसे-जैसे अपने युद्धों की संख्या बढ़ाते रहे वैसे-वैसे उनके दुश्मनों की संख्या भी बढ़ती रही. शिवाजी के सबसे बड़े दुश्मन मुगल थे. साल 1657 में शिवाजी ने मुगलों के खिलाफ लड़ाई शुरू की थी.
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शिवाजी जैसे-जैसे अपने युद्धों की संख्या बढ़ाते रहे वैसे-वैसे उनके दुश्मनों की संख्या भी बढ़ती रही. शिवाजी के सबसे बड़े दुश्मन मुगल थे. साल 1657 में शिवाजी ने मुगलों के खिलाफ लड़ाई शुरू की थी.
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साल 1674 में शिवाजी ने महाराष्ट्र में हिंदू राज्य की स्थापना की थी. शिवाजी का राज्याभिषेक करने वाराणसी के पंडित आए थे और शिवाजी ने सभी पंडितों का आदर सम्मान मराठा साम्राज्य में ही किया.
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शिवाजी वीर पुरुष थे और सभी धर्मों का आदर करते थे. शिवाजी ने अपना राष्ट्रीय ध्वज नारंगी रखा क्योंकि इसे हिंदुत्व का प्रतीक माना जाता है. इसे शिवाजी ने अपने गुरू स्वामी रामदास से पाया था.
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स्वामी रामदास जी ने शिवाजी की भक्ति देखकर ही उन्हें नारंगी रंग का कपड़ा फाड़कर ध्वज बनाने के लिए दिया था. इस ध्वज को आज भी मराठियों ने अपना धार्मिक ध्वज बनाया है.
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राज्य की चिंता को लेकर अक्सर शिवाजी का मन परेशान रहने लगा था और इसके कारण उनकी तबियत खराब रहने लगी थी. लगातार 3 हफ्तों तक उनकी तबियत खराब ही रही.
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3 अप्रैल, 1680 को तेज बुखार आने के कारण शिवाजी महाराज जैसे वीर योद्धा का निधन हो गया था. उन्होंने अपने अंतिम क्षणों पर बेटे शंभाजी को अपना साम्राज्य सौंप दिया था.