इंदौर (मध्य प्रदेश), 28 अप्रैल (भाषा) कोविड-19 की दूसरी लहर के घातक प्रकोप के कारण जिला प्रशासन शादी समारोहों को मंजूरी देने से साफ इनकार कर चुका है। इसके बावजूद अलग-अलग स्थानों पर ऐसे समारोहों के आयोजन के मामले सामने आ रहे हैं।

पुलिस के एक अधिकारी ने बुधवार को बताया कि राऊ क्षेत्र में प्रशासन की अनुमति के बिना विवाह समारोह आयोजित करने पर दो मामलों में वर-वधू के परिजनों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है।

उन्होंने बताया कि ये मामले भारतीय दंड विधान की धारा 188 (किसी सरकारी अधिकारी का आदेश नहीं मानना) और धारा 269 (ऐसा लापरवाही भरा काम करना जिससे किसी जानलेवा बीमारी का संक्रमण फैलने का खतरा हो) के तहत पंजीबद्ध किए गए हैं।

राऊ पुलिस थाने के प्रभारी नरेंद्र सिंह रघुवंशी ने बताया, 'दोनों मामलों में जब हमारी टीम मंगलवार को विवाह समारोहों के आयोजन स्थलों पर पहुंची, तो मेहमान वहां से भाग गए। हमने मौके से तंबू, रोशनी का सामान, कुर्सियां और अन्य सामान जब्त किया है।'

इस बीच, कई जागरूक नागरिक प्रशासन को सतर्क करने के लिए कथित शादी समारोहों की तस्वीरें और इनके निमंत्रण पत्र सोशल मीडिया पर डाल रहे हैं।

पुलिस उप महानिरीक्षक (डीआईजी) मनीष कपूरिया ने कहा, 'महामारी के प्रकोप को देखते हुए शहर के अधिकांश परिवारों ने शादी समारोह स्थगित कर दिए हैं।'

उन्होंने बताया, 'कई लोगों के बारे में सूचना मिली है कि वे अपने घरों के भीतर चंद रिश्तेदारों की मौजूदगी में शादी की रस्में निभा रहे हैं। पुलिस की इस सिलसिले में हालात पर नजर बनी हुई है।'

गौरतलब है कि मध्य प्रदेश में इंदौर कोविड-19 से सबसे ज्यादा प्रभावित जिला है। अधिकारियों ने बताया कि महामारी की रोकथाम के लिए जिला प्रशासन ने 30 अप्रैल तक 'जनता कर्फ्यू' (आंशिक लॉकडाउन) लागू किया है और शादी समारोहों व अन्य सामाजिक कार्यक्रमों को भी अनुमति नहीं दी जा रही है।

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक करीब 35 लाख की आबादी वाले जिले में 24 मार्च 2020 से लेकर अब तक कोरोना वायरस संक्रमण के कुल 1,07,240 मरीज मिले हैं। इनमें से 1,123 लोगों की इलाज के दौरान मौत हो चुकी है।