खीरी लोकसभा के सांसद अजय मिश्र 'टेनी' केंद्र सरकार में गृह राज्यमंत्री बनने के बाद बड़े विवाद में फंस गए हैं. लखीमपुर के तिकुनिया में प्रदर्शन के दौरान किसानों पर गाड़ी चढ़ा देने के कथित मामले में सांसद अजय मिश्र 'टेनी' और उनके बेटे आशीष मिश्र 'मोनू' पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं. तो आइए जानते हैं कौन हैं अजय मिश्र और कैसे वह सिर्फ दूसरी बार सांसद बन केंद्रीय मंत्री की कुर्सी पर जा पहुंचे.

बम्पर वोटों से जीता लोकसभा चुनाव 

अजय मिश्र 2019 में लगातार दूसरी बार उत्तर प्रदेश की खीरी लोकसभा सीट से सांसद चुने गए.  इससे पहले वह 2012 के विधानसभा चुनाव में लखीमपुर-खीरी की निघासन सीट से विधायक बने थे. हालांकि, 2014 में बीजेपी ने उनपर विश्वास जताते हुए खीरी से लोकसभा प्रत्याशी बनाया और उन्होंने जीत दर्ज की. उनकी जीत का अंतर करीब 1 लाख 10 हजार वोटों का था. इसके बाद 2019 में अजय मिश्र ने सवा दो लाख वोटों से जीत दर्ज की. 

अजय मिश्र टेनी, लखीमपुर-खीरी के निघासन में 25 सितंबर 1960 को जन्मे थे. शिक्षा की बात करें तो टेनी के पास बीएससी और एलएलबी की डिग्रियां हैं. अजय मिश्र की पत्नी का नाम पुष्पा मिश्र है, उनके तीन बच्चे हैं. लोकसभा के लिए 2019 में दोबारा चुने जाने के बाद उन्हें मोदी सरकार में पब्लिक अकाउंट्स कमिटी और फूड, कंज्यूमर अफेयर्स और पब्लिक डिस्ट्रिब्यूशन कमिटी के सदस्य के रूप में जिम्मेदारी मिली.  

अजय मिश्र संघ के करीबी हैं. इसके साथ ही अजय मिश्र एक अनुशासन प्रिय यक्ति के रूप में संसद में देखे जाते रहे हैं और संसद में अपनी उपस्थिति, आचरण और सक्रियता बना कर रखने वाले नेता हैं. इसी के चलते उन्हें हाल ही में संसद रत्न सम्मान भी मिला था. बता दें कि अजय मिश्र यूपी के ऐसे पहले सांसद हैं, जिन्हें इस सम्मान से नवाजा गया. अजय मिश्र सदन में तकरीबन सौ फीसदी उपस्थिति बना कर रखने के लिए जाने जाते हैं. साथ ही वह अपने लोकसभा क्षेत्र में विकास कार्यों के लिए आस-पास के जिलों में लोकप्रिय हैं. 

क्यों बनाए गए गृह राज्यमंत्री 

उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव के लिहाज से अजय मिश्र का मोदी कैबिनेट में जगह पाना अहम है. अजय मिश्र दूसरी बार सांसद चुने गए हैं, वह लखीमपुर-खीरी से आते हैं और एक ब्राह्मण चेहरा हैं. नेपाल की सीमा से लगे लखीमपुर-खीरी, सीतापुर, बहराइच, शाहजहांपुर और पीलीभीत जैसे जिलों में ब्राह्मण वोटों की तादाद ज्यादा है. इन जिलों में बीजेपी को 2022 विधानसभा चुनाव में टेनी को मंत्री बनाए जाने का फायदा मिल सकता था. इसी को देखते हुए उन्हें मंत्रिमंडल में जगह मिलने की बातें कही जाती हैं. 

उत्तर प्रदेश में अंदर ही अंदर एक सुगबुगाहट है कि राज्य के ब्राह्मण बीजेपी और योगी सरकार से नाराज चल रहे हैं. बातें हो रही हैं थी कि योगी सरकार में क्षत्रिय समाज के लोगों को ज्यादा तवज्जो दी जा रही है. बता दें कि हाल ही में हुए जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव में भी बीजेपी पर क्षत्रिय समाज के अधिक लोगों को टिकट देने का आरोप भी लगा था. यूपी में क्षत्रिय समाज के 16 जिला पंचायत अध्यक्ष चुने गए हैं, जिसमें से 15 बीजेपी के हैं. ऐसे में बीजेपी ने इसे काउंटर करने के लिए ब्राह्मण बाहुल तराई इलाके से एक सांसद को केंद्रीय मंत्री बनाया.