शताब्दी की सबसे बड़ी त्रासदी COVID-19 महामारी में भारत की लड़ाई में सोनू सूद ने अहम रोल अदा किया है. फिल्मों में विलेन का रोल करने वाले सोनू सूद पलायन कर रहे प्रवासी मजदूरों के हीरो बनकर उभरे. सोनू ने इस आपदा में शहर में फंसे मजदूरों को उनके घर-गांव पहुंचाने में मदद कर रहे हैं. इस नेक पहल के लिए सोनू को प्रशंसकों के साथ ही सेलिब्रिटीज और सरकार की तरफ से भी सराहना मिल रही है.

तमिल सिनेमा से बतौर एक्टर अपने करियर की शुरुआत करने वाले सोनू सूद ने आज बॉलीवुड में अपनी एक मजबूत पकड़ बना ली है. वह पंजाब के मोगा से आते हैं, उनके पिता की बॉम्बे क्लॉथ नाम से मोगा में एक कपड़े की दुकान थी और मां प्रोफेसर थीं. सोनू सोनू बचपन से ही एक्टर बनना चाहते थे. हर मां की तरह सोनू की मां भी चाहती थीं कि बच्चा पढ़कर कोई अच्छी नौकरी करे. ऐसे में उन्होंने सोनू को इंजीनियरिंग करने के लिए नागपुर भेज दिया. सोनू  इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियर बन भी गए. पर सोनू इससे संतुष्ट नहीं हुए क्योंकि एक्टिंग उनका सपना था.

सोनू ने अपनी मां से एक साल की मोहलत मांगी और कहा कि अगर मैं नाकाम रहा तो वापस आकर पापा की कपड़े की दुकान संभाल लूंगा. इसके बाद सोनू अपने सपने पूरा करने मुंबई आ गए. यहां से उन्होंने स्ट्रगल करना शुरू किया. सोनू ने मुंबई में पांच-छह लोगों के साथ एक कमरा शेयर किया. हर जगह रिजेक्ट हो रहे सोनू ने थक हारकर साउथ इंडियन सिनेमा की राह पकड़ी. हर जगह अप्लाई कर रहे सोनू को कॉल आया कि उन्हें साउथ इंडियन फिल्म के लिए सिलेक्ट कर लिया गया है. उनको ऑडिशन के लिए चेन्नई बुलाया गया. यहां पर ऑडिशन में डायरेक्टर प्रोड्यूसर ने सोनू से शर्ट उतारने के लिए कहा, जिसे सुन वह घबरा गए. लेकिन फिर उन्होंने रोल के लिए ये भी करने का रिस्क उठाया. सोनू की जबरदस्त फिजीक देखकर सब काफी प्रभावित हुए और उन्हें  साउथ इंडियन फिल्म में रोल मिल गया.  

तमिल सिनेमा में काम करने के बाद सोनू को बॉलीवुड में भी काम मिलना शुरू हो गया. इसकी शुरुआत हुई 2002 में आई 'शहीद-ए-आजम भगत सिंह' से, जिसमें उन्होंने भगत सिंह का रोल निभाया. इसके बाद सोनू ने युवा, आशिक बनाया आपने, जोधा अकबर, सिंह इज किंग, दबंग और सिंबा जैसी सफल फिल्मों में अभिनय किया.