देश में लोहड़ी का त्योहार मना जा रहा है. हालांकि, इसका सबसे ज्यादा प्रचलन पंजाब और हरियाणा में है लेकिन इसे देश के विभिन्न राज्यों में मनाया जाता है. ये खासतौर पर उत्तर भारत में मनाया जाने वाला त्यौहार है. ये मकर संक्रांति पर्व के एक दिन पहले मनाया जाता है. लोहड़ी को लेकर कई परंपराएं हैं और इसका खास महत्व भी है.

लोहड़ी में आग जलाकर पूजा की जाती है. इस दौरान आग में मूंगफली, गुड़ और मकई का लावा चढ़ाते हैं. ऐसी मान्यता है कि किसान अग्नि देवता से खेतों की उपज बढ़ाने की प्रार्थना करते हैं.

त्यौहार में मूंगफली, गुड़ बांटा जाता है. इस दिन गज्जक खाना शुभ माना जाता है और पकवान के तौर पर गुड के तिल के चावल, सरसों का साग, मक्के की रोटी बनाई जाती है.

ऐसा माना जाता है कि लोहड़ी का त्यौहार सर्दियों के जाने और बसंत के आने का संकेत है. लोहड़ी के पावन मौके पर लोग रबी की फसल यानि गेहूं, जौ, चना, मसूर और सरसों की फसलों को आग को समर्पित करते हैं. क्योंकि रबि की फसल कट कर घर आने लगती है.

लोहड़ी का महत्व एक और वजह से हैं क्योंकि इस दिन सूर्य मकर राशि से गुजर कर उत्तर की ओर रूख करता है. ज्योतिष के मुताबिक, लोहड़ी के बाद से सूर्य उत्तारायण बनाता है जिसे जीवन और सेहत से जोड़कर देखा जाता है.

इसका एक और महत्व है कि किसान लोहड़ी के दिन को नए साल की आर्थिक शुरुआत के रूप में भी मनाते हैं.