महाशिवरात्री का हिंदू धर्म में काफी महत्व है. इस दिन पूरी विधि के साथ भगवान शिव की पूजा की जाती है. लोग मंदिरों में जाकर शिवलिंग की पूजा करते हैं. लेकिन क्या आपको पता है कि शिवलिंग की पूजा क्यों की जाती है.

भारतीय धर्म की पुरानी पद्धतियों में सनातन काल से ही लिंग पूजा का चलन रहा है. क्योंकि पुरानी कई सभ्यताओं में लिंग और योनि के अवशेष मिले हैं. हालांकि, ये पूजा से संबंधित है ये कह पाना मुश्किल है. लेकिन ये इस तरफ इशारा करते हैं कि पुरानी सभ्यता के लोग लिंग की पूजा करते थे.

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शैव मत के अनुसार, भगवान शिव ने बारह ज्योतिर्लिंगों के रूप में खुद को प्रकट किया था. वहीं, मां पार्वती ने भी भगवान शिव को पाने के लिए बालू से बने लिंग की पूजा की थी.

पुरानी कथाओं के अनुसार, ब्रह्माजी और भगवान विष्णु ने खुद को सृष्टि का रचियता बताने की शर्त लगी थी, तब भगवान शिव एक ज्योतिर्लिंग के रूप में प्रकट हुए थे, जिसके ओर-छोर का पता लगाने में ब्रह्मा और विष्णु दोनों ही असफल रहे थे. ऐसे में उस लिंग से भगवान शिव प्रकट हुए और उन्होंने खुद को सृष्टि का आदिपुरुष बताकर ब्रह्मा और विष्णु दोनों का भ्रम दूर किया था.

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इन पौराणिक कथाओं के मुताबिक ही लोग आज भी शिवलिंग की पूजा करते हैं. लेकिन इसका कोई ठोस प्रमाण नहीं है.

इस खबर को मान्यताओं और पौराणिक कथाओं के मुताबिक बनाया गया है. ये एक सूचना की तरह है इसकी विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है.