केंद्र सरकार के कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों का विरोध प्रदर्शन जारी हैं. करीब 8 महीने से किसान प्रदर्शन कर रहे हैं. वहीं, संसद के मानसून सत्र से पहले किसान आंदोलन फिर रंग में दिख रही है. किसान मानसूत्र सत्र के साथ ही जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे हैं. किसानों का कहना है कि आंदोलन के 8 महीने होने के बाद भी सरकार के पास बात करने की समय नहीं हैं. वहीं, किसान आंदोलन को लेकर बीजेपी सांसद मीनाक्षी लेखी ने विवादित बयान दे दिया है.

मीनाक्षी लेखी ने कहा, वे किसान नहीं मवाली हैं. आंदोलन की आड़ में कुच बिचौलियों की मदद की जा रही है. इसके जरिए राजनीतिक एजेंडे को धार दी जा रही है. इसके जरिए एक नरेटिव आगे बढ़ाया जा रहा है.

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गौरतलब है कि, किसान संगठन दिल्ली के जंतर मंतर पर 'किसान संसद' आंदोलन कर रहे हैं. भारतीय किसान सभा के महासचिव हन्नान मोल्लाह ने कहा, किसानों की बात संसद नहीं सुन रही है इसलिए सभी सांसदों को हमने चिट्ठी दिया है कि हमारे वोट से जीते हैं तो ऐसा करें कि हम वोट देते समय याद रखें. ईमानदार हैं तो हमारा सवाल उठाएं.

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उन्होंने कहा, यह 13 अगस्त तक लगातार चलेगा. प्रतिदिन 200 किसान सिंघु बॉर्डर से आएंगे और किसानों के मुद्दे पर चर्चा होगी. आज 3 कानूनों के पहले कानून APMC पर चर्चा हुई. इसके बाद हम कानून को संसद में खारिज करेंगे और संसद से अपील करेंगे कि 'किसान संसद' की बात मानकर कानून खारिज करे.

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