केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कोरोना मरीजों के इलाज के लिए सस्ते एवं व्यापक रूप से इस्तेमाल किए जाने वाले स्टेरॉयड डेक्सामेथासोन को मंजूरी दे दी है. इसके लिए कोविड-19 के मध्यम से लेकर गंभीर संक्रमित मरीजों के उपचार संबंधी प्रोटोकॉल में शामिल कर लिया है.

मंत्रालय ने बताया कि अद्यतन किए गए ‘क्लिनिकल मैनेजमेंट’ में कोविड-19 के मध्यम से गंभीर स्तर के मामलों के प्रबंधन के लिए मिथाइलप्रेडनिसोलोन के विकल्प के तौर पर डेक्सामेथासोन के इस्तेमाल की सलाह को शामिल किया है. इस स्टेरॉयड का इस्तेमाल पहले ही सूजन कम करने वाले और प्रतिरक्षा क्षमता को कम करने जैसे इसके प्रभावों के कारण अनेक स्थितियों में किया जाता रहा है. यह बदलाव ताजा उपलब्ध साक्ष्यों पर विचार करने एवं विशेषज्ञों के साथ विचार-विमर्श करने के बाद किया गया.

केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव प्रीति सूदन ने संशोधित प्रोटेाकॉल सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को इसकी उपलब्धता के लिहाज से जरूरी बंदोबस्त करने के लिए भेज दिये हैं. स्वास्थ्य मंत्रालय ने 13 जून को कोविड-19 के इलाज के लिए आपातकाल में वायरस-रोधी दवा रेमडेसिविर, प्रतिरोधक क्षमता के लिए इस्तेमाल होने वाली दवा टोसीलीजुमैब के इस्तेमाल और मध्यम स्तर के रोगियों को प्लाज्मा उपचार की अनुमति दे दी थी. उसने बीमारी की शुरुआत में मलेरिया रोधक दवा हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन (एचसीक्यू) का इस्तेमाल करने और गंभीर मामलों में इससे बचने की भी सलाह दी थी.

इन दवाओं का इस्तेमाल ‘‘अनुसंधानात्मक पद्धति’’ के तहत संशोधित उपचार प्रोटोकॉल में शामिल है. मध्यम रूप से संक्रमित मरीजों को विशेषत: भर्ती किए जाने के 48 घंटे के भीतर या ऑक्सीजन की आवश्यकता बढ़ने पर उपचार के लिए तीन दिन तक 0.5 से 1 मिलीग्राम / किग्रा मिथाइलप्रेडनिसोलोन या 0.1 से 0.2 मिलीग्राम / किग्रा डेक्सामेथासोन दिए जाने पर विचार करने की सलाह दी है.

प्रोटोकॉल में कहा गया है कि नैदानिक प्रतिक्रिया के अनुसार दवा के इस्तेमाल की अवधि की समीक्षा की जानी चाहिए. मंत्रालय ने कहा कि जिन मरीजों को सांस लेने में दिक्कत है और जिन्हें यांत्रिक वेंटिलेशन की आवश्यकता है, उन्हें पांच से सात दिन तक दो खुराकों में बांट कर एक से दो मिलीग्राम / किग्रा/दिन मिथाइलप्रेडनिसोलोन या 0.2 से 0.4 मिलीग्राम / किग्रा प्रति दिन डेक्सामेथासोन देने पर विचार किया जाना चाहिए.

भारत में यह संशोधित प्रोटोकॉल ऐसे समय में जारी किया गया है जब देश में कोरोना वायरस संक्रमण 5 लाख के पार कर गया है. साथ ही 15 हजार से ज्यादा मौतें हुई है.