तालिबान के सह-संस्थापक मुल्ला अब्दुल गनी बरादर जल्द ही घोषित होने वाली नई अफगान सरकार का नेतृत्व करेंगे. न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने मुताबिक़, इस्लामी समूह के सूत्रों ने शुक्रवार को इस बात की पुष्टि की है. नई सरकार को आते ही तालिबान-पंजशीर घाटी के लड़ाकों के बीच जारी जंग और आर्थिक समस्यायों से निपटना होगा. 

रॉयटर्स की ही रिपोर्ट के अनुसार, अफगान सरकार में मुल्ला मोहम्मद याक़ूब (तालिबान के सह-संस्थापक मुल्ला उमर के बेटे) और शेर मोहम्मद अब्बास स्तनिकज़ई उच्च पद संभाल सकते हैं.

इस बीच तालिबान ने कहा है कि चीन उसका सबसे महत्वपूर्ण साझेदार है. तालिबान ने कहा कि वह अफगानिस्तान के पुनर्निर्माण के लिए चीन की तरफ देखता है. अफगानिस्तान में तांबे का पर्याप्त भंडार है और तालिबान इन इन खदानों के जरिए भुखमरी और आर्थिक संकट को दूर की तरफ देख रहा है.

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कौन है मुल्ला बरादर? 

मुल्ला अब्दुल गनी बरादर का जन्म साल 1968 में अफगानिस्तान के उर्जगान प्रान्त में हुआ था. उसका बचपन सोवियत संघ समर्थित सरकार के खिलाफ संघर्ष में बीता था. मुल्ला अब्दुल गनी बरादर, तालिबान के संस्थापक सदस्यों में से एक है. वह तालिबान के संस्थापक रहे मुल्ला मोहम्मद उमर का करीबी सहयोगी है. 1994 में तालिबान का गठन करने वाले चार लोगों में मुल्ला अब्दुल गनी बरादर भी एक था.

मुल्ला अब्दुल गनी, तालिबान में नंबर दो की हैसियत रखता है और वह इस समय इस आतंकी संगठन का राजनीतिक हेड है. 1996 में मुल्ला अब्दुल गनी बरादर को तालिबान शासन में उप रक्षा मंत्री बनाया गया था.  दोहा में जो अमेरिका-तालिबान और अन्य देशों के बीच समझौता हुआ उसपर मुल्ला अब्दुल गनी बरादर ने ही हस्ताक्षर किए. 

2010 में पाकिस्तान ने मुल्ला अब्दुल गनी बरादर को गिरफ्तार कर लिया था. लेकिन, 2018 में डोनाल्ड ट्रंप के निर्देश और तालिबान के साथ डील के बाद पाकिस्तान ने उसे रिहा कर दिया.  

तालिबान के अफगानिस्तान पर कब्जे के बाद सामने आए एक वीडियो में हवाईअड्डे पर मुल्ला अब्दुल गनी बरादर का काबुल में जोरदार स्वागत देखने को मिलता है. उसके आसपास 

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