गुजरात की जानी-मानी गायिका उर्वशी बेन रादड़िया ने न केवल गुजरात में बल्कि विश्व में प्रसिद्धि हासिल की है. उन्होंने कोरोना महामारी के दौरान नवरात्रि के अवसर पर Opoyi से विशेष बातचीत में अपने जीवन और लॉकडाउन से जुड़े अनुभवों को साझा किया. 

गुजरात में ऐसे कई कलाकार हैं, जिन्होंने अपनी कला से राज्य का गौरव बढ़ाया है. गुजरात की बेटी जिसने राज्य की संस्कृति को न केवल भारत में बल्कि विश्व मंच पर लाया है, उसने हमेशा गरीब, जरूरतमंद लोगों की सेवा करने के लिए तत्परता दिखाई है, वही गुजरात की प्रसिद्ध गायिका उर्वशी बेन रादड़िया, जिनके नाम से आपको उनकी उपलब्धियों का एहसास होता है. उर्वशी बेन हमेशा अपने अनोखे दृष्टिकोण और अपने गायन के कारण सुर्खियों में रही हैं. Opoyi से बात करते हुए उर्वशी ने बताया कि बचपन से ही उन्हें संगीत से लगाव रहा है. 

बचपन से ही संगीत से लगाव  

उर्वशी ने बताया कि उनके माता-पिता संगीत कार्यक्रम किया करते थे और इसी से उनके अंदर भी संगीत प्रेम जागा. उन्होने कहा, 'मुझे संगीत से लगाव कम उम्र से था क्योंकि मेरे माता-पिता उस समय संगीत कार्यक्रम किया करते थे, इसलिए मुझे संगीत विरासत में मिला. उस समय मैं पांच साल की थी और मैं उनकी गोद में बैठकर संगीत सुनती थी और कभी-कभी मैं उनका माइक भी खींच लिया करती थी कि मुझे भी गाना है. फिर मैंने 3 साल का शास्त्रीय संगीत प्रशिक्षण लिया. इस प्रकार कम उम्र में संगीत में मेरा करियर शुरू हुआ.'

IAS अधिकारी बनने का सपना देखा

ये पूछे जाने पर कि उनका असल में क्या बनने का सपना था? उन्होंने कहा, 'IAS अधिकारी बनना मेरा सपना था. क्योकि मैं छोटी उम्र से पढ़ाई में अच्छी थी और मुझ में हमेशा कुछ कर दिखाने का जज्बा रहा है, इसलिए यह देखकर मेरे एक रिश्तेदार ने कहा कि आपको IAS बनना चाहिए और तब से मैंने IAS के सपने देखने शुरू कर दिए और मैंने एक परीक्षा भी दी. लेकिन मंजिल मेरी संगीत थी इसलिए मैं वहीं पहुंची.'

मेरे फैंस मेरी सच्ची पूंजी है

उर्वशी ने कहा, 'लोग मुझे दिल से मानते हैं और यही मेरी सच्ची पूंजी है. वह मुझसे बहुत जुड़े हुए हैं और मैं भी उनसे बहुत जुड़ी हुई हूं. क्योंकि मैं और मेरे प्रशंसक एक-दूसरे के साथ भावनात्मक रूप से जुड़े हुए हैं. लॉकडाउन के दौरान, मुझे देश और विदेश के कई लोगों के संदेश मिले जो मेरे लिए बहुत यादगार रहे हैं और मैंने उनके स्क्रीनशॉट भी लिए हैं क्योंकि वे संदेश बहुत ही मार्मिक थे. साथ ही मेरे अंदर मेरे साथी कलाकारों के लिए मान और सम्मान है. यह मेरे लिए मेरी सच्ची पूंजी है."

उर्वशी बेन रादड़िया ने लॉकडाउन के दौरान जरूरतमंदों की मदद की. 

समाज सेवा करके प्रचार करना सही नहीं है

समाज में उनके योगदान के बारे में पूछे जाने पर, उर्वशी बेन ने कहा, 'यह प्रचार का विषय नहीं है. क्योंकि मैं अपने लिए सामाजिक कार्य करती हूं और मेरा योगदान उनके लिए है जिन्होंने मुझे इतना प्यार दिया है. मैं किसी को यह भी नहीं बताती कि ऐसा कुछ मेरे द्वारा किया गया है.'  हालांकि, जब उर्वशीबेन से पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि वे और अधिक नहीं कहेंगी लेकिन लॉकडाउन के दौरान जितना बन पाया उन्होंने गरीब और जरूरतमंद परिवारों की मदद की और कोरोना वॉरियर्स की भी थोड़ी मदद की.

उर्वशी बेन रादड़िया को बचपन से संगीत में रूचि.  

जो मैंने 28 साल में नहीं सीखा, वो पिछले 6 महीने में सीख लिया

यह पूछे जाने पर कि कोरोना के कारण लॉकडाउन की वजह से जीवन में क्या फर्क पड़ा है, उर्वशी बेन ने बताया, 'यह समय मेरे लिए बहुत अच्छा रहा है क्योंकि चाहे संगीत हो या शारीरिक फिटनेस, मुझे इसपर ध्यान देने का समय मिला है और विशेष रूप से संगीत के क्षेत्र में मैंने इन 6 महीनों में जो सीखा है, वह मैंने अपने 28 वर्षों के जीवन में नहीं सीखा, इसलिए मैं कह सकती हूं कि दुनिया में बहुत से लोगों को बहुत नुकसान हुआ है, लेकिन मुझे व्यक्तिगत रूप से बहुत फायदा हुआ है.'

आप संगीत के माध्यम से हमारी संस्कृति से जुड़ सकते हैं

उर्वशी बेन ने कहा, "मुझे गर्व है कि मैं गुजराती हूं और जब हम यहां की संस्कृति के साथ विदेश जाते हैं, तो वहां के लोग भी गुजरात की संस्कृति को जानने के लिए उत्सुक होते हैं. और विशेष रूप से हमारा काम हमारी संस्कृति को जीवित रखना है और हम इसके लिए काम कर रहे हैं और संगीत के माध्यम से गुजरात की संस्कृति को दुनिया में ले जाना हमारे लिए गर्व की बात है."