नयी दिल्ली, 25 मई (भाषा) राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) ने राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण, मुंबई के डीएचएफएल मामले में एक आदेश पर रोक लगा दी है। एनसीएलटी ने डीएचएफएल के ऋणदाताओं को आवास वित्त कंपनी के पूर्व प्रवर्तक कपिल वधावन के प्रस्ताव पर विचार करने का निर्देश दिया था।

एनसीएलएटी के कार्यवाहक चेयरमैन न्यायमूर्ति ए आई एस चीमा और सदस्य तकनीकी वी पी सिंह की अवकाश पीठ ने एनसीएलटी की मुंबई पीठ द्वारा पारित आदेश पर स्थगन दे दिया।

इस मामले से जुड़े एक अधिवक्ता ने बताया कि एनसीएलटी, मुंबई ने 19 मई को निर्देश दिया था कि डीएचएफएल के ऋणदाता वधावन द्वारा की गई पेशकश पर विचार करें।

हालांकि, अपीलीय न्यायाधिकरण ने स्पष्ट किया है कि उसका यह आदेश एनसीएलटी के ऋणदाताओं की समिति (सीओसी) द्वारा चुनी गई योजना की मंजूरी के आड़े नहीं आएगा।

इस साल जनवरी में सीओसी ने दिवाला प्रक्रिया के तहत डीएचएफएल की बिक्री पिरामल समूह को करने के पक्ष में मतदान किया था।

एनसीएलएटी ने यह आदेश दीवान हाउसिंग फाइनेंस कॉरपोरेशन लि. (डीएचएफसीएल) की ऋणदाताओं की समिति की ओर से यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की याचिका पर दिया है। एनसीएलएटी के इस आदेश को अभी अपीलीय न्यायाधिकरण की वेबसाइट पर नहीं डाला गया है।

एनसीएलटी की मुंबई प़ीठ ने पिछले सप्ताह रिजर्व बैंक द्वारा नियुक्त डीएचएफएल के प्रशासक को निर्देश दिया था कि वह जेल में बंद वधावन द्वारा की गई समाधान योजना को सीओसी के समक्ष रखें। न्यायाधिकरण ने सीओसी को इस पेशकश पर विचार के लिए 10 दिन का समय दिया था।