सरकार और किसानों के बीच कृषि कानूनों को लेकर शुक्रवार को आठवीं वार्ता की गई है. हालांकि, इस बार भी वहीं नतीजा सामाने आया जो इससे पहले की बातचीत में हुआ था. यानी इस बार भी वार्ता बेनतीजा ही रही. एक ओर कृषि कानूनों को खत्म करने की मांग पर किसान अड़ें है लेकिन सरकार इससे सीधे-सीधे मानने को तैयार नहीं है.

बैठक के बाद हरियाणा के सीएम मनोहर लाल खट्टर ने कहा, केवल इन तीन क़ानूनों को ख़त्म करने, न करने का विषय नहीं है, उसके अंदर कई प्रावधान हैं जिसपर बात चल रही है. अगर सिर्फ कृषि क़ानूनों को वापस लेने तक की बात होती तो अब तक ये बातचीत समाप्त हो चुकी होती.

वहीं, भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा, यहां केवल तारीख पर तारीख चल रही है. बैठक में सभी किसान नेताओं ने एक आवाज़ में बिल रद्द करने की मांग की. हम चाहते हैं बिल वापस हो, सरकार चाहती है संशोधन हो। सरकार ने हमारी बात नहीं मानी तो हमने भी सरकार की बात नहीं मानी.

केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा, आज किसान यूनियन के साथ तीनों कृषि क़ानूनों पर चर्चा होती रही परन्तु कोई समाधान नहीं निकला. सरकार ने बार-बार कहा है कि किसान यूनियन अगर क़ानून वापिस लेने के अलावा कोई विकल्प देंगी तो हम बात करने को तैयार हैं. आंदोलन कर रहे लोगों का मानना है कि इन क़ानूनों को वापिस लिया जाए। परन्तु देश में बहुत से लोग इन क़ानूनों के पक्ष में हैं.

वहीं, अखिल भारतीय किसान सभा के महासचिव ने कहा, सरकार ने हमें कहा कि कोर्ट में चलो। हम ये नहीं कह रहे कि ये नए कृषि क़ानून गैर-क़ानूनी है. हम इसके खिलाफ हैं. इन्हें सरकार वापिस ले। हम कोर्ट में नहीं जाएंगे। हम अपना विरोध प्रदर्शन जारी रखेंगे.

अब सरकार और किसानों के बीच बातचीत के लिए अगली बैठक 15 जनवरी को रखी गई है. किसान यूनियन और सरकार दोनों ने 15 जनवरी को दोपहर 12 बजे बैठक का निर्णय लिया है.