नयी दिल्ली, 28 अप्रैल (भाषा) उद्धव ठाकरे के पेशेवर विज्ञापन फोटोग्राफर से लेकर महाराष्ट्र का मुख्यमंत्री बनने तक के निजी एवं राजनीतिक जीवन को एक नयी पुस्तक का विषय बनाया गया है।

पत्रकार राधेश्याम जाधव की किताब “ट्रेल ऑफ द टाइगर’’ में उद्धव के नेतृत्व में शिवसेना के “भगवा से धर्मनिरपेक्षता के मार्ग पर चलने” की कहानी भी बयां की गई है।

जाधव का कहना है कि राजनीति में उद्धव की लंबी यात्रा बालासाहेब के जोशीले समर्थकों की वजह से ही संभव हुई है।

ब्लूम्सबरी द्वारा प्रकाशित इस पुस्तक में पत्रकार ने लिखा, “ये शिवसैनिक हिंदुत्व और मराठियों के ‘दुश्मनों’ के खिलाफ सड़कों पर उतर कर लड़ाई लड़ने के लिए तैयार थे। बालासाहेब ठाकरे ने एक पंथ का निर्माण किया और उसे उद्धव को सौंप दिया।”

उद्धव ने एक बार कहा था कि धर्म का उपयोग आग भड़काने और सत्ता प्राप्त करने के लिए किया जाना उनका हिंदुत्व नहीं है। लोगों का एक-दूसरे को मारना भी हिंदुत्व नहीं है।

लेखक ने कहा कि उद्धव महाराष्ट्र के अलावा अन्य राज्यों में भाजपा के हिंदुत्व संस्करण की बजाय शिवसेना वाले हिंदुत्व के वैकल्पिक विमर्श को तलाशते हुए प्रतीत होते हैं।

उन्होंने लिखा, “वैकल्पिक हिंदुत्व के साथ उद्धव का प्रयोग नया लग सकता है किंतु वह असल में अपने दादा केशव सीताराम ठाकरे के मार्ग पर चल रहे हैं। 1921 में, समाज सुधारक एवं लेखक, केशव ठाकरे ने पाक्षिक पत्रिका ‘प्रबोधन’ शुरू की थी जिसने उन्हें प्रबोधंकर की उपाधि दिलाई थी।”

जाधव ने लिखा, “वह हिंदुत्व में अत्यंत विश्वास रखते थे और 1918 में वह कार्यकर्ता गजानन वैद्य के साथ हिंदू मिशनरी सोसाइटी स्थापित करने में शामिल हो गए ताकि इसाई एवं इस्लाम में धर्मांतरित किए गए हिंदुओं का फिर से धर्म परिवर्तित कर उन्हें हिंदू बनाया जा सके। पुन: धर्मांतरण का यह अभियान ऐसे समय में आया था जब हिंदू इस विचार के विरूद्ध थे।”

पुस्तक में उद्धव के स्कूल के दिनों और उनकी युवावस्था से जुड़ी कुछ घटनाओं का भी उल्लेख है।

साथ ही इसमें भाजपा के साथ उनके संबंध, उसके साथ पार्टी का गठबंधन टूटने तथा कांग्रेस एवं राकांपा के साथ गठबंधन बनने का विस्तार से वर्णन किया गया है।

भाषा

नेहा माधव

माधव