नयी दिल्ली, 19 अप्रैल (भाषा) कोविड-19 की दूसरी लहर पर अंकुश के लिए कई राज्यों ने लॉकडाउन की घोषणा की है जिससे लघु अवधि में घरों की बिक्री प्रभावित होगी। उद्योग के विशेषज्ञों का हालांकि मानना है कि डिजिटल मंचों के जरिये इसके प्रभाव को कुछ कम करने में मदद मिलेगी।

रियल एस्टेट उद्योग को उम्मीद थी कि इस कैलेंडर वर्ष में आवासीय इकाइयों की बिक्री 2019 के स्तर पर पहुंच जाएगी क्योंकि जुलाई, 2020 से मांग में सुधार आने लगा था।

उद्योग विशेषज्ञों ने कहा कि कोविड की मौजूदा लहर के बीच राज्य सरकारों ने लॉकडाउन/कर्फ्यू लगाया है जिससे निश्चित रूप से आर्थिक सुधार की प्रक्रिया पर ‘ब्रेक’ लगेगा।

क्रेडाई के अध्यक्ष हर्ष वर्धन पटोडिया ने पीटीआई-भाषा से कहा, ‘‘नाइट फ्रैंक की रिपोर्ट के अनुसार चालू वर्ष की पहली तिमाही में आवास क्षेत्र ने 44 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की है। लेकिन कोविड-19 के मामलों में हालिया तेजी से लघु अवधि में रियल एस्टेट क्षेत्र की वृद्धि प्रभावित होगी।’’

पटोडिया ने कहा कि आंशिक या छोटी अवधि के लॉकडाउन में खरीदारों की धारणा अस्थायी रूप से प्रभावित होगी। उन्होंने कहा कि इसके साथ ही लोग महामारी के बीच घरों में निवेश करना चाहेंगे।

हाउसिंग.कॉम और प्रॉपटाइगर.कॉम के समूह मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) ध्रुव अग्रवाल ने कहा कि विभिन्न राज्य सरकारों का लॉकडाउन/कर्फ्यू लगाने का फैसला सही है।

उन्होंने कहा कि इससे एक बार फिर आवास क्षेत्र प्रभावित होगा। हालांकि, अब क्षेत्र की स्थिति कुछ सुधर रही थी। अग्रवाल ने उम्मीद जताई कि अब ग्राहक ऑनलाइन सर्च की ओर स्थानांतरित होंगे जिससे इसके प्रभाव को सीमित किया जा सकेगा।

सॉथबे इंटरनेशनल रियल्टी के भारत में सीईओ अमित गोयल ने कहा कि लॉकडाउन/कर्फ्यू की वजह से संपत्ति लेनदेन में अस्थायी तौर पर कुछ सुस्ती आएगी। हालांकि, इससे लक्जरी और बड़े घरों की मांग प्रभावित नहीं होगी क्योंकि महामारी के बीच अब लोग खुला और बड़ा घर खरीदना चाहते हैं।

एनारॉक के चेयरमैन अनुज पुरी ने कहा कि कोविड के बढ़ते मामलों से देश में आवासीय इकाइयों की मांग उतनी प्रभावित नहीं होगी, जो पिछले साल देखने को मिली थी।

भाषा अजय

अजय महाबीर

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