(कुणाल दत्त)

नयी दिल्ली, 23 मई (भाषा) कोरोना वायरस संक्रमण की दूसरी लहर के दौरान दिल्ली में अस्पतालों पर बोझ बढ़ा हुआ है, जिसके चलते गैर-कोविड रोगियों को पर्याप्त चिकित्सा देखभाल नहीं मिल पा रही है। ऐसे में डॉक्टरों का कहना है कि कैंसर और कान-नाक-गले से संबंधित गैर-कोविड रोगी दीर्घकालिक परेशानियों का सामना कर रहे हैं।

महामारी की दूसरी लहर के मद्देनजर 19 अप्रैल से लागू पाबंदियों का न केवल प्रवासी कामगारों और गरीबों पर बुरा असर पड़ा है बल्कि गैर-कोविड चिकित्सा सेवाओं के बाधित होने से कई अन्य वर्गों की परेशानियां भी बढ़ गई हैं।

नामचीन सरकारी और निजी अस्पतालों के डॉक्टरों का कहना है कि क्योंकि अधिकांश चिकित्सा मशीनरी फिलहाल घातक कोविड-19 से निपटने में लगी है और आवाजाही पर पाबंदी है। ऐसे में सर्जरी या कान, नाक, गला(ईएनटी) का इलाज कराने वाले गैर-कोविड रोगियों तथा गर्भवती महिलाओं को विशेष रूप से नुकसान उठाना पड़ रहा है।

इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल के ईएनटी विभाग के वरिष्ठ कंसल्टेंट डॉक्टर सुरेश सिंह नरुका ने कहा, ''गैर कोविड सेवाएं व्यापक रूप से प्रभावित हुई हैं, लेकिन अस्पताल आपात स्थिति में ऐसे रोगियों के लिये सर्वश्रेष्ठ करने की कोशिश कर रहा है।''

उन्होंने कहा, ''एक बार हमारे सामने एक केस आया था, जिसमें एक व्यक्ति ने बिजली का बल्ब निगल लिया था। उसकी जान बचाने के लिये हर सेकेंड कीमती था। लिहाजा, हमने तुरंत प्रक्रिया शुरू की और उसे बचा लिया गया।''

हालांकि कैंसर रोगियों के लिये यह इंतजार किसी तकलीफ के समान साबित हो रहा है क्योंकि सर्जरी में देरी का मतलब है लंबा दर्द झेलना।

नरुका ने कहा, ''मेरा एक रोगी था, जो कैंसर से पीड़ित था। अप्रैल में उसका ऑपरेशन होना था, लेकिन कोविड-19 हालात और दिल्ली में लॉकडाउन के चलते उसकी सर्जरी एक महीना टल गई। नतीजतन, इस दौरान उसका कैंसर का स्तर बढ़ने से उसकी परेशानियां बढ़ गईं। गैर-कोविड रोगियों के लिये भी यह मुश्किल समय है।''

प्रसिद्ध दंत चिकित्सक डॉक्टर अनिल कोहली ने कहा, ''हमें लोगों को सेवाएं प्रदान करनी ही हैं और इसके लिये हमें नए हालात से सामंजस्य बिठाना होगा।''

उन्होंने 'पीटीआई-भाषा' से कहा, ''पिछले साल पहली लहर में हमें कुछ समझने का मौका नहीं मिला था और स्वास्थ्य कर्मियों के साथ-साथ उन रोगियों में भी बहुत डर था, जो दांतों में असहनीय दर्द होने के बावजूद अपने घरों से बाहर निकलने में चिंतित महसूस कर रहे थे।''

कोहली ने कहा कि हालांकि अब टीकाकरण प्रक्रिया जारी है और अधिकतर स्वास्थ्यकर्मी टीका लगवा चुके हैं। लिहाजा वे भी सुरक्षित महसूस करते हुए सेवाएं प्रदान कर रहे हैं। धीरे-धीरे गैर-कोविड रोगियों की परेशानियां दूर हो रही हैं।