जम्मू-कश्मीर को दोबारा स्पेशल स्टेटस दिलाने के लिए उमर अब्दुल्ला मुखर आवाज में अपनी बात रख रहे हैं. पब्लिक सेफ्टी एक्ट के तहत 8 महीने तक जेल में रहे उमर अब्दुल्ला को ये सब काफी दुर्भाग्यपूर्ण लग रहा है. उन्होंने Opoyi के लिए जावेद एम अंसारी से खास इंटरव्यू में जम्मू-कश्मीर में पिछली स्थिति की बहाली को लेकर कई तर्क दिए.

1.सवाल- जम्मू-कश्मीर में स्पेशल स्टेटस की बहाली के लिए गठबंधन एक साथ आया है. ये मामला सुप्रीम कोर्ट में भी है, वहीं आप भी इसकी बहाली के लिए कैसे लड़ रहे हैं?

उमर- हम पहले इसे सुप्रीम कोर्ट में लड़ेंगे, क्योंकि हमारा मानना है कि हमारे पक्ष में एक मजबूत मामला बन रहा है. दूसरा, इसे जनता के समक्ष भी रखेंगे और राज्य के विशेष रूप से जम्मू, लेह और कारगिल के लोगों को भी इसके सभी पहलूओं के बारे में बारीकी से व्याख्या करके समझाएंगे. हम इस मुद्दे को संसद में भी उठाते रहेंगे. समान विचारधारा वाले दलों से भी बात करेंगे. साथ ही उन लोगों की गलतफहमियां भी दूर करेंगे, जो इस मुद्दे पर हो सकती हैं.

2.सवाल- संसद में आपके कुछ सहयोगी दलों जैसे कांग्रेस ने इस स्पेशल स्टेटस के हटाए जाने के पक्ष में मतदान किया. इस पर क्या कहेंगे?

उमर- यह वाकई आश्चर्यजनक है और कांग्रेस पार्टी को भी अपनी अंतरआत्मा को इस बारे में जरूर बताना पड़ेगा. हमसे जो छीन लिया गया वह भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की विरासत है. हम जिसे पाने के लिए लड़ रहे हैं, वह हमें दिया गया था और जवाहरलाल नेहरू द्वारा हमारे लिए बनाया गया था. बड़ी अजीब बात है कि कांग्रेस उस विरासत को तोड़ रही है. कांग्रेस की राज्य ईकाई इस मामले पर की गई हमारी बैठक से दूर रही, हालांकि शुरुआत में वे इसका हिस्सा थे. वैसे पी चिदंबरम जैसे कई कांग्रेसी नेता हैं, जो हमारे समर्थन में बुहत मुखर और मजबूत हैं. इसके साथ ही द्रमुक प्रमुख एमके स्टालिन और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी हमारे पक्ष में आवाज उठाई है.

3.सवाल- नेशनल कॉन्फ्रेंस और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी ने जम्मू-कश्मीर की विशेष स्थिति की बहाली के लिए गठबंधन की घोषणा की है. आप किससे सवाल पूछ रहे हैं? वही मोदी सरकार जिसने पहली बार में ही विशेष राज्य का दर्जा बदल दिया?

उमर- हमें बीजेपी की सोच बदलने की कोई उम्मीद नहीं है. हमारा ऐसा इरादा बिल्कुल नहीं है. हालांकि हम इस बात को भी मानते हैं और इतिहास इसका प्रमाण भी है कि कोई भी सरकार या पार्टी हमेशा सत्ता में नहीं रहती. हम लंबी लड़ाई लड़ने के लिए उतरे हैं. 5 अगस्त 2019 को जो हमसे छीन लिया गया उसे स्वीकार करने का कोई सवाल ही पैदा नहीं होता.

4.सवाल- फारूक अब्दुल्ला ने अनुच्छेद 370 को बहाल करने के लिए चीन से मदद मांगी, क्या आप उससे सहमत हैं.

उमर- यह उनके द्वारा तय नहीं किया गया, इसका संबंध दूसरों द्वारा किए गए कार्यों से है. वह सिर्फ यही दर्शाना चाहते थे कि जमीनीस्तर पर लोग क्या कहते हैं. यहां कोई भी चीन की भूमिका की वकालत नहीं कर रहा.

5. सवाल-आप और आपके पिता राज्य में भारतीय समर्थक आवाज रहे. इसके बावजूद आपको PSA के तहत कैद में रखा गया. क्या आपने सोचा था कि आपको 'राज्य के दुश्मन' के रूप में देखा जाएगा?

उमर- मैंने कभी नहीं सोचा था कि मुझे मेरे ही लोगों का, मेरे राज्य का और मेरे देश का दुश्मन माना जाएगा. जरा उन आधारों को देखें जो मुझे PSA के तहत रखने के लिए गढ़े गए. लोगों को घर से बाहर निकलकर चुनावी प्रक्रिया में भाग लेने की मेरी क्षमता को ही मेरी नजरबंदी का आधार बनाया गया. अब बताएं कि भविष्य में आप लोगों से कैसे उम्मीद कर सकते हैं कि वे चुनावों में भाग लेने के लिए लोगों के प्रेरित करेंगे. मगर उन्होंने इस पर कुछ नहीं सोचा. उनका विचार सिर्फ हमें अपमानित करने का था. यह निराश करने वाला है, सिर्फ हमारे लिए ही नहीं बल्कि इस राज्य के लोगों और महबूबा मुफ्ती साहिबा जैसे नेताओं के लिए भी. देश का वादे से पीछे हटना, यह सचमुच चोट पहुंचाने वाला है. इसे देखकर दर्द होता है कि पूरे राज्य को लॉकडाउन में डाल दिया गया था और बुनियादी मानव अधिकारों से वंचित कर दिया गया था.

6. सवाल- क्या अब आप खुद को कश्मीरी अधिक और भारतीय कम महसूस करते हैं?

उमर- दोनों को एक-दूसरे से जुदा करके कभी नहीं देखा. सच्चाई ये है कि मैं एक कश्मीरी हूं और एक भारतीय हूं.

7. सवाल- महबूबा मुफ्ती के साथ नए गठबंधन के तहत स्पेशल स्टेटस की बहाली के पक्षकारों ने एक राजनीतिक बातचीत भी की है. ये पक्षकार कौन हैं और क्या वे पाकिस्तान को भी इस बातचीत में शामिल कर रहे हैं?

उमर- सबसे पहले तो पक्षकार जम्मू-कश्मीर के लोग ही हैं. पहले उनके साथ ही शुरू करते हैं और यह सब भारत सरकार के डोमेन में है.

8. सवाल-वार्ताकारों की राजनीतिक मांगें क्या हैं, जिन पर काम होना चाहिए?

उमर- हम बिल्कुल स्पष्ट हैं कि राज्य का स्पेशल स्टेटस दोबारा बहाल किया जाए.

9. सवाल- क्या ये सच्चाई नहीं कि स्थिति के परिवर्तन ने आपको बिना किसी राजनीतिक जगह के अलग-थलग कर दिया. ईमानदारी से क्या उनसे बात करना मुश्किल नहीं होगा, जो ये सोचते हैं कि मुख्यधारा की पार्टियों ने जम्मू-कश्मीर के लिए किया क्या है?

उमर- जो लोगों से ले लिया गया, उसकी दोबारा बहाली से ज्यादा कुछ नहीं. यह उनके सामने अब तक का सबसे बड़ा मुद्दा है. लद्दाख में लोग अपने अधिकारों की बहाली को लेकर आंदोलन कर रहे हैं, जम्मू में लोग अपनी डोगरा पहचान की सुरक्षा चाहते हैं, मुद्दे तो बहुत हैं, कोई कमी नहीं है.

10. सवाल- आम लोगों का मन भांपना मुश्किल है. आप लोगों तक पहुंचना कब शुरू करेंगे. अब तक आपने सिर्फ केवल बंद दरवाजें की बैठकें की हैं?

उमर- हमने कभी बाहर जाना बंद नहीं किया. हम बैठकें करते रहे हैं और जानबूझकर सुरक्षा चिंताओं और महामारी के कारण सभा को छोटा रखते हैं. लोगों को बड़ी संख्या में इकट्ठा होने के लिए कहकर जोखिम में डालना हमारे लिए बहुत गैर जिम्मेदाराना होगा.

11.सवाल- आप और आपके पिता ने पिछले साल 5 अगस्त से पहले पीएम मोदी से मुलाकात की थी, जब राज्य का भाग्य बदल गया. क्या आप फिर से पीएम पर भरोसा करेंगे?

उमर- बैठक में क्या बातचीत हुई थी, इस पर किसी और दिन बात करेंगे. मैंने कभी नहीं कहा कि मुझे उन पर भरोसा नहीं है. इस बातचीत के बारे में भविष्य में बात होगी. ये विश्वास की कमी की बात नहीं है. मुझे पता है कि यह एक राजनीतिक मुद्दा  है. इसलिए मैं भाजपा को बदलने की कोशिश नहीं कर रहा हूं. मुझे पता है कि मैं ये नहीं कर सकता.

12. सवाल-आप कभी भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए (अटल बिहारी वाजपेयी) के मंत्री थे. महबूबा ने भी भाजपा के साथ सत्ता साझा की. क्या आप फिर कभी भाजपा के साथ हाथ मिलाएंगे?

उमर- मैं कभी भी काल्पनिक सवाल का स्पष्ट जवाब नहीं देता, हालांकि मुझे बहुत आश्चर्य होगा अगर NC कभी NDA गठबंधन का हिस्सा होगी.

13. सवाल-आपने पहले साक्षात्कार में कहा था कि आप आहत हैं. अपने व्यक्तिगत घाव के बारे में कुछ कहेंगे?

उमर- इस बारे में यही कहूंगा कि इस पर बात करने से भी दर्द होता है. यकीनन महबूबा जी को 14 महीने के लिए जेल, बहुत सारे नेताओं और कार्यकर्ताओं को जेल में देखना, हमारे लोगों को पीड़ित देखना बहुत दुखद था. ये चोट मेरे और मेरे पिता के साथ नहीं थी बल्कि हम सभी के लिए थी. यह पूरे राज्य के लिए थी.

14. सवाल-क्या किसी स्तर पर यह गठबंधन चुनावी गठबंधन में भी बदल जाएगा?

उमर- इसमें चुनाव नहीं, इसलिए यह एजेंडे में भी नहीं है. यह हमारी स्थिति और हमारे अधिकारों की बहाली के लिए एक राजनीतिक गठबंधन है.