भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को हम श्री कृष्ण जन्माष्टमी के नाम से जानते हैं. 1 वर्ष में कृष्ण पक्ष की 12 अष्टमी आती हैं. उन 12 अष्टमी में भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी विशेष मानी जाती है. यह अष्टमी भगवान कृष्ण के जन्म से जुड़ी हुई है, जिसमें कहा गया है कि जन्माष्टमी के समय अर्धरात्रि व्याप्त तिथि की उपस्थिति विशेष रूप से मान्य होती है. इसलिए मंगलवार के दिन भरणी नक्षत्र वृद्धि योग तथा कौलव करण, मेष राशि के चंद्रमा की साक्षी में मनाई जाएगी.

11 अगस्त यानी मंगलवार सुबह 7:42 तक सप्तमी तिथि है. इसके बाद सुबह 7:43 बजे अष्टमी लगेगी. इसे लेकर मंगलवार को अष्टमी का पर्व मनाया जा रहा है.

ज्योतिषाचार्य पंडित अमर डब्बावाला के अनुसार- भगवान कृष्ण के जन्म को लेकर भारतीय सनातन धर्म परंपरा में प्रारंभ से ही दो मत प्रचलित हैं, जिसमें पहला मत स्मार्त है व दूसरा मत वैष्णो मत कहा जाता है. इस दृष्टि से पहले मत के अनुसार-जन्माष्टमी शिव भक्तों की मानी जाती है तथा दूसरी अष्टमी वैष्णव भक्तों की मानी गई है. यहां पर एक और रोचक तथ्य है, जो रामानुज संप्रदाय के लोग हैं, वे रोहिणी नक्षत्र में जन्माष्टमी का पर्व मनाते हैं. इस दृष्टि से पूरे भारत में जन्माष्टमी को लेकर के यह तीन मत हमेशा से थे, हमेशा से हैं और आगे भी रहेंगे, क्योंकि सनातन धर्म परंपरा में शिव मत के और वैष्णो मत के भक्त गण मौजूद हैं. इस दृष्टि से इस पर्व की परंपरा शास्त्रोक्त व्याख्या और पूजा पद्धति भी इसी के अनुसार की जाती है.

पंच महापुरुष योग में शश योग का भी संयोग

भारतीय ज्योतिष शास्त्र में पंच महापुरुष योगों का उल्लेख किया गया है. उनमें से एक शनि के द्वारा शश योग भी सम्मिलित हैं. यह केंद्र योग बना कर भी बैठे हैं. जब भगवान कृष्ण का जन्म होगा तब यह शश योग विशेष रूप से उपस्थित रहेगा. यहीं शनि केंद्र योग बना करके भी बैठेंगे. साथ ही योग गणना में शश योग रहेगा. यह योग मानव जीवन में राज्य पद की प्राप्ति के लिए विशेष अनुष्ठान के द्वारा अपने लक्ष्य की सफलता के लिए प्रमुख तौर पर जाना जाता है. इस दृष्टि से यह सफलता का भी सूचक है.

रात्रि 12:42 पर सर्वार्थसिद्धि भी

कृष्ण जन्म के 1 घंटे बाद नक्षत्र और दिन की गणना से सर्वार्थ सिद्धि योग का भी संयोग बन रहा है. यह लक्ष्य की सिद्धि के लिए जाना जाता है. इस योग में की गई धार्मिक साधना मनोवांछित फल प्रदान करती है.

हूताशन योग दिवस काल में जब सप्तमी का संयोग मंगलवार के साथ हो तब हूताशन नाम का योग बनता है. इस योग में रोग दोष की निवृत्ति के लिए पूजा-पाठ किया जाता है. वर्तमान व्याप्त कोरोना का संकट का निराकरण भी इस योग में किया जा सकता है. 

ऐसे करें पूजा

भगवान कृष्ण का विष्णु रूप में पंचामृत अभिषेक के साथ ही फलों के रसों से अभिषेक और श्री कृष्ण स्त्रोत के पाठ या विष्णु सहस्त्रनाम स्त्रोत के पाठ एवं सुदर्शन कवच तथा नारायण कवच का पाठ यथा श्रद्धा करने से शारीरिक स्वास्थ्य ठीक होता है. साथ ही यदि एक पाठ तथा प्रक्रिया 21 दिन करने से सुरक्षा कवच, बौद्धिक प्रगति,आत्मविश्वास में वृद्धि तथा रोग दोष से मुक्ति मिलती है इसलिए जन्माष्टमी विशेष पर विधिवत की किए गए पूजन-पाठ और उत्सव की परंपरा निसंदेह लाभ प्रदान करती हैं.