बिहार में हत्या के एक बड़े मामले को लेकर पत्रकारों ने जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को घेरा तब दोनों तरफ से गरमागरम बहस हुई. इस हफ्ते की शुरुआत में राज्य की राजधानी में हुई हत्या का यह मामला सुर्खियों में है.

नगर के एक बड़े हिस्से में यातायात की भीड़ को कम करने के लिए 379.57 करोड़ रुपये की लागत से बनाए गए ‘अटल पथ’ के पहले चरण का लोकार्पण करने के बाद कुमार संवाददाताओं से बात कर रहे थे.

करीब डेढ़ दशक पहले सत्ता में आने के बाद ढांचागत सुधार के बारे में मुख्यमंत्री ने जैसे ही बोलना शुरू किया, पत्रकारों ने उन्हें गिरती कानून-व्यवस्था को लेकर टोका और नगर में मंगलवार की शाम को हुई एक निजी एयरलाइन के युवा अधिकारी की हत्या पर सवाल उठाए.

कुमार ने कहा, ‘‘कृपया विकास और अपराध के मामलों को मत मिलाइए.’’ संवाददाताओं द्वारा बार-बार पूछने पर उन्होंने कहा, ‘‘आपकी बातों से राज्य पुलिस हतोत्साहित होगी, जो अपना काम कर रही है. मैंने खुद ही डीजीपी को समन किया और आवश्यक निर्देश दिए.’’

संवाददाताओं ने जब कहा कि पुलिस अपराध रोकने में सक्षम नहीं है तो उन्होंने कहा, ‘‘क्या कोई हत्यारा अपराध करने से पहले अनुमति लेता है? क्या आपके पास साझा करने के लिए कोई सूचना है, अगर है तो कीजिए.’’

क्षुब्ध मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘देश में सबसे कम अपराध वाले राज्यों में बिहार भी शामिल है. खराब तस्वीर पेश करने से पहले दूसरे राज्यों को भी देखें. और क्या आपको याद है कि डेढ़ दशक पहले जब पति-पत्नी की सरकार थी तो चीजें कितनी खराब थीं.’’

कुमार का इशारा राजद नेता लालू प्रसाद और उनकी पत्नी राबड़ी देवी की ओर था.

कुछ वरिष्ठ पत्रकारों ने कहा कि वे भी पुलिस के साथ कुछ जानकारी साझा करना चाहते हैं लेकिन डीजीपी फोन ही नहीं उठाते हैं और जो व्यक्ति फोन उठाता है वह ब्यौरा लिखकर कहता है कि अधिकारी वापस फोन कर लेंगे, लेकिन ऐसा कभी नहीं होता.

इसके बाद मुख्यमंत्री ने डीजीपी एस के सिंघल को खुद फोन किया और उन्हें निर्देश दिया कि पत्रकारों के साथ बातचीत की व्यवस्था बनाएं. राज्य पुलिस प्रमुख ने तुरंत इस बारे में आदेश के साथ साथ मोबाइल एवं लैंडलाइन नंबर जारी किए जिस पर मीडियाकर्मी उनसे संपर्क कर सकते हैं.

राज्य की राजधानी में पत्रकारों से बहस के बाद मुख्यमंत्री यहां से 110 किलोमीटर दूर राजगीर रवाना हो गए जहां उन्होंने पार्क का उद्घाटन किया.