मध्यप्रदेश में हो रहे उपचुनाव का प्रचार प्रसार रविवार शाम को थम गया हैं. अब 3 नवंबर को 28 सीटों पर मतदान होगा. लेकिन आखिरी के तीन दिनों के प्रचार के दौरान चंबल और मालवा क्षेत्र में तेजी से समीकरण बदलते नजर आ रहे हैं. मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के रोड शो के बाद सांवेर में तुलसी सिलावट की स्थिति मजबूत होती नजर आई, तो वहीं बदनावर में कांग्रेस प्रत्याशी कड़े मुकाबले में आ गए हैं. दूसरी ओर चंबल के सुमावली में दो दिन पहले बीजेपी आगे थी,अब यहां कांग्रेस प्रत्याशी बेहतर हो गए. इस तरह 28 सीटों पर अब 12 पर बीजेपी, 11 पर कांग्रेस आती नजर आ रही है. वहीं 5 सीटों पर अब भी कांटे का मुकाबला है.

एक नजर में देखें किस विधानसभा सीट पर कौन सी पार्टी बेहतर स्थिति में हैं

अशोकनगर में जातिगत फैक्टर अब चुनावी रंग लेने लगा है. कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में जजपालसिंह जज्जी इसे भुनाने में लगे हुए हैं. यहां उनकी जाति को लेकर विवाद हुआ था. अनुसूचित जाति की सीट पर कांग्रेस प्रत्याशी आशा दोहरे हैं जो जैन परिवार की बहू हैं. बीजेपी के भीतरघात को जज्जी संभाल पाए तो राह आसान हो जाएगी. लेकिन यहां मुकाबला कड़ा होता नजर आ रहा हैं.

डबरा में कमल नाथ के आइटम वाले बयान के बाद इमरती देवी इसे भुनाने तो लगी हैं, लेकिन वह भी विवादित बयान देने लगीं हैं. इससे उनके पक्ष में जो माहौल बन रहा था, वह अब दिखाई नही दे रहा हैं. लेकिन अब भी ग्राफ इमरती देवी का ही ऊपर दिख रहा है. यहां कांग्रेस की ओर से सुरेश राजे उम्मीदवार हैं. उनकी स्थिति ठीक ठीक मानी जा रही हैं.

मुंगावली में बीजेपी के बृजेंद्र सिंह यादव को यादव वोट बैंक पर भरोसा है, लेकिन फिर भी​ स्थिति ठीक नहीं है. आपको बता दे कि यहां करीब 40 हजार से ज्यादा यादव वोटर हैं. वहीं दूसरी ओर कांग्रेस के कन्हई राम लोधी की स्थिति मजबूत दिखाई दे रही हैं. यहां मामला कुछ ओर भी है जिसकी जानकारी भारतीय जनता पार्टी को भी है. यहां बीजेपी सांसद केपी यादव के समर्थकों की पर्दे के पीछे से की जा रही मदद काम आ रही है.

ग्वालियर पूर्व में कांग्रेस से बीजेपी में आए मुन्नालाल गोयल को लेकर व्यापारी वर्ग में नाएनडीएी देखी जा रही है. इसे लेकर गोयाल की मुश्किले यहां बढ़ती नहर आ रही है. वहीं कांग्रेस की ओर से उपचुनाव में प्रत्याशी सिकरवार की व्यक्तिगत छवि अच्छी होने के कारण जनता का समर्थन मिल रहा है. यहां भी बीजेपी और कांग्रेस में मुकाबला कांटे का हो गया.

ग्वालियर में कांग्रेस की स्थिति सुधरी लेकिन बीजेपी फिर भी आगे हैं. यहां कांग्रेस प्रत्याशी सुनील शर्मा की स्थिति में सुधार तो हुआ लेकिन बीजेपी से मंत्री प्रद्युम्न तोमर की छवि लोगों में अच्छी होने के कारण इसका फायदा उन्हें वोट में बदलने के रूप में मिल सकता है.

करैरा में बसपा के टिकट पर तीन बार चुनाव लड़कर हार चुके कांग्रेस प्रत्याशी प्रागीलाल जाटव की सहानुभूति के सामने बीजेपी की तमाम कोशिशें असफल होते दिख रही हैं. करैरा में सिंधिया की सभा भी बड़ा कमाल नहीं कर पाई है. यहां बीजेपी से जसवंत जाटव उम्मीदवार हैं. हालांकि, समाज का रुझान कांग्रेस को मिलते दिख रहे हैं, जो निर्णायक साबित हो सकता है. लेकिन यहां बीजेपी अपना प्लान बी लागू कर कुछ बदलवा करने के प्रसास कर रही है.

पोहरी में जातिगत के साथ समाज के वोटों को साधने में बीजेपी के सुरेश धाकड़ सफल होते दिख रहे हैं. कांग्रेस के हरिवल्लभ शुक्ला की मुश्किल बढ़ती नजर आ रही हैं. वहीं दूसराी ओर धाकड़ वोटों के एकजुट होने बीजेपी की राह यहां आसान होती नजर आ रही हैं.

भांडेर में बीजेपी की रक्षा सिरोनिया की मुश्किलें बढ़ती दिखाई दे रही है. यहां मंत्री नरोत्तम मिश्रा मंत्र कुछ खास असर नहीं दिखा पाया. यहां चुनावी मंत्र देने के साथ यादव वोट साधने की कोशिश तो की गई हैं लेकिन जातिगत समीकरणों के कारण कांग्रेस के फूलसिंह बरैया अब भी सेफ जोन में दिखाई दे रहे हैं. तो वहीं बीजेपी ने सिंधिया, शिवराज दोनों को साथ रोड शो का भी आयोजन कर दिया.

बमोरी में मंत्री महेंद्रसिंह सिसौदिया की स्थिति बेहतर देखी जा रही है. यहां जातिगत फैक्टर के साथ सिसौदिया ने समय रहते विरोधियों को भी साध लिया है. वहीं दूसरी ओर कांग्रेस प्रत्याशी के एल अग्रवाल को मुश्किल आ रही है. क्यों की अग्रवाल बीजेपी से कांग्रेस में आए थे लेकिन वे इस मैनेजमेंट में सिसौदिया से पिछड़ गए.

क्या चंबल में खिलेगा कमल

मेहगांव में देरी से टिकट मिलने के बाद हेमंत कटारे ने बीजेपी को जातिगत समीकरण के दम मुश्किल में डाल दिया है. पिछले दो दिनों हुए घटना क्रम से बघेल वोटों के कांग्रेस तरफ रूझान दिखने को मिले है इसी के चलते बीजेपी यहां पिछड़ सकती है. यहां ठाकुर, ब्राह्मण वोट निर्णायक साबित होंगे.

अंबाह की बात करें तो यहां बीजेपी के कमलेश जाटव पिछड़ते हुए नजर आ रहे थे. लेकिन मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान के एक कूटनीतिक दांव ने वापस मुकाबले में ला दिया. यहां सीएम ने मंच से कह दिया था कि यहीं से हार गए तो प्रधानमंत्री के बगल में बैठने वाले नरेंद्रसिंह तोमर की प्रतिष्ठा का क्या होगा. इसके बाद से ही केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने गांव-गांव जाकर प्रचार किया. दूसरी ओर बसपा से आए कांग्रेस उम्मीदवार को सत्यप्रकाश सखवार को जातिगत वोटों पर भरोसा है, लेकिन निर्दलीय अभिनव छारी के कारण मुकाबला दिलचस्प हो गया है.

दिमनी में तो जातिगत समीकरणों के कारण यहां चुनाव के आखिरी दौर में भी हवा कांग्रेस के तरफ जाती नजर आ रही हैं. यहां मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, उमा भारती, नरेंद्र तोमर तक साथ सभाएं कर चुके हैं, लेकिन माहौल बदलने में कामयाब नहीं हो सके. बीजेपी के प्रत्याशी गिर्राज दंडोतिया के लिए ठाकुर वोटबैंक सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ हैं. वहीं कांग्रेस को ठाकुर और दलित वोट दोनों ही मिल सकते हैं. इसी के चलते कांग्रेस को इस सीट पर फायदा मिलता नजर आ रहा हैं.

मुरैना में पारंपरिक वोटबैंक व्यापारी वर्ग को बीजेपी ने साधने की काफी कोशिश की, लेकिन यहां बसपा उम्मीदवार रामप्रकाश राजौरिया की मजबूती सामने आने का फायदा कांग्रेस के प्रत्याशी राकेश मावई को मिल सकता है. यहां मुकाबला कड़ा है. लेकिन बसपा को मजबूत देखते हुए यहां बीजेपी ने प्लान बी लागू कर रखा है.

गोहद में सीधे-सीधे लड़ाई शहरी और ग्रामीण वोटों पर बंटती नजर आ रही है. यहां 84 गांवों को साधने में कांग्रेस के मेवाराम आगे दिखाई दे रहे है तो वहीं बीजेपी के रणवीर शहरी वोटर्स के भरोसे है. गोहद, मोह जैसे शहरी इलाकों के दम बीजेपी मजबूत तो है लेकिन ठाकुर बहुल 84 गांवों को साधने में पूर्व मंत्री गोविंदसिंह ने खासी मेहनत की है. दूसरी ओर ग्रामीण क्षेत्र में वोटिंग ज्यादा हुई तो कांग्रेस के मेवाराम जाटव को फायदा मिलेगा.

सुमावली विधानसभा की बात करें तो यहां कुशवाह, गुर्जर और सिकरवार वोटों के बहुल वाली सीट पर समीकरण तेजी से बदलते नजर आ रहे हैं. बीजेपी ने यहां गुर्जर उम्मीदवार को उतारा है. ऐसे में अब सिकरवार वोटों का रुझान कांग्रेस की तरफ जाता दिखाई दे रहा हैं. इसी कारण से बीजेपी प्रत्याशी एंदल सिंह कंसाना की मुश्किल बढ़ती नजर आ रही हैं. यहां कांग्रेस उम्मीदवार अजब सिंह कुशवाह अपनी राह आसान बना सकते हैं. उन्होंने यहां सिकरवार वोटर्स को साधने में कोई कमी नहीं छोड़ी हैं और वहीं एंदल सिंह कंसाना में सिकरवार वोटर्स को साधने में चूक गए हैं.

जौरा में कांग्रेस नये चेहरे पंकज उपाध्यास को उतारकर फंसती नजर आ रही है. यहां दो बार के विधायक सोनेराम कुशवाह बसपा से चुनाव लड़ रहे हैं, जिससे कांग्रेस का जातिगत वोट बंट सकता है. मुख्यमंत्री की अपील के बाद बीजेपी प्रत्याशी सूबेदार को धाकड़ समाज की पंचायतों का सम​र्थन मिल सकता है. इससे बीजेपी की राह आसान हो गई है. आपको बता दे कि यहां सीट पूर्व विधायक बनवारीलाल शर्मा के निधन से खाली हुई थी.

क्या मालवा में चलेगा शिवराज सिंधिया का जादू

सांवेर मध्यप्रदेश के उपचुनाव की सबसे हॉट सीट पर बीजेपी ने छोटे से लेकर बड़े नेता को लगा दिया था. शिवराज-सिंधिया की लगातार सभाओं ने यहां तुलसी सिलावट के पक्ष में माहौल तो बनाया है. वहीं कांग्रेस के प्रेमचंद गुड्डू, विधायक जीतू पटवारी के साथ पसीना बहाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं. यहां सभी दिग्गज नेताओं ने सांवेर तक मेट्रो लाने का वादा देकर लोगों को अपने पक्ष में किया है. लेकिन यहां भी टक्कर कांटे की नजर आ रही हैं.

आगर में बीजेपी के गढ़ में मनोहर ऊंटवाल के बेटे मनोज परंपरागत वोटों के भरोसे हैं. लेकिन यहां कांग्रेस प्रत्याशी विपिन वानखेड़े को क्षेत्र में सक्रिय रहने का फायदा मिल रहा है. कमल नाथ सरकार गिरने के दो महीने पहले ही विधायक मनोहर ऊंटवाल का निधन हुआ था, उसके बाद फरवरी, मार्च में कांग्रेस प्रत्याशी विपिन ने इलाके में अघोषित विधायक की तरह सक्रियता दिखाई थी. इसका फायदा उन्हें मिल सकता है.

हाटपिपल्या में मामला टस से मस होता नजर आ रहा है. यहां कांग्रेस प्रत्याशी राजवीरसिंह बघेल के पक्ष में माहौल बनाने के लिए शनिवार को ही कमलनाथ ने बरोठा में रैली निकली थी. बावजूद इसके बघेल, बीजेपी प्रत्याशी मनोज चौधरी से पिछड़ गए हैं. वहीं रविवार को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी यहां रोड शो किया तो सफल होता नजर आया.

बदनावर में मंत्री राजवर्धन सिंह दत्तीगांव के लिए कुछ महीने पहले हुई एक बड़ी घटना मुश्किल बन सकती है. संघ समर्थकों से जुड़ा मामला होने से चर्चा है कि जिस तरह से पहले भी विश्रामगृह में बैठकर केस लदवाए गए थे, यह बदला लेने का वक्त है. इसी के चलते यहां कांग्रेस के कमल पटेल को बराबरी पर ला दिया है. यहां राजवर्धन खुद व्यक्तिगत संपर्क कर मतदाताओं को साधने में जुटे हैं क्योंकि संघ और बीजेपी के कुछ नेता राजवर्धन से नाराज भी हैं.

सुवासरा में पाटीदार वोटर्स का रूख अब बीजेपी के उम्मीदवार हरदीप सिंह डंग की राह को और मुश्किल बना रहा है. यहां कांग्रेस कृषि कानून के नए प्रावधान का मुद्दा उठा रही है क्योंकि किसान आंदोलन का सबसे बड़ा असर यहीं पर देखने को मिला था. कांग्रेस ने उससे जुड़े राकेश पाटीदार को उतारा है. हालांकि, जमीनी पकड़ के कारण बीजेपी के डंग अब भी मजबूत हैं.

क्या निमाड़ में 2 सीटों पर खिलेगा कमल

नेपानगर में कांग्रेस की मजबूत स्थिति देख बीजेपी ने यहां पूरी ताकत लगाई है. यहां बीजेपी ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं को बीजेपी की सदस्यता दिलाई है. यहां सीएम को उनके द्वारा किये वादे परेशान कर रहे हैं क्यों की एक भी वादा पूरा नहीं हुआ. यहीं कारण है कि यहां सीएम ने नेपानगर को छोड़कर चार सभाएं की है. आपको बता दे कि यहां बीजेपी से सुमित्रा कास्डेकर और कांग्रेस से रामकिशन पटेल मैदान में हैं.

मांधाता में बीजेपी संगठन ने अपने प्रत्याशी नारायण पटेल के लिए पूरी ताकत लगाई है. मुख्यमंत्री खुद यहां चार सभा कर चुके हैं लेकिन फिर भी मतदाताओं का इरादा बदलता नजर नहीं आ रहा है. यहां कांग्रेस के राजनारायण के बेटे उत्तम पाल सिंह की स्थिति मजबूत बनी हुई है. यहां आदिवासी समाज के एक प्रत्याशी के मैदान में उतरने से बीजेपी के स्थायी वोटर भिलाला भी उनके हाथ से निकलते नजर आ रहे हैं.

क्या भोपाल की सीट पर चलेगा सिंधिया का जादू

ब्यावरा में बीजेपी प्रत्याशी नारायण पवार बूथ मैनेजमेंट के मामले में पहले से ही मजबूत थे. जिसका फायदा उन्हें मिलता नजर आ रहा है. यहां रामचंद्र दांगी सहित पूरी कांग्रेस चुनाव के आखिरी मौके तक इसमें पिछड़ती नहर आई है. हालांकि, कुछ स्थानीय मुद्दों को उठाने में कांग्रेस प्रत्याशी रामचंद्र मुकाबले में आने की कोशिश तो की लेकिन यहां सिंधिया की सभाओं का जादू देखने को मिलेगा.

सांची विधानसभा से प्रभुराम चौधरी को लेकर सिंधिया ने यहां कई सभाएं की है. वहीं शिवराज सिंह की चेतावनी के बाद न्यूट्रल नेता भी सक्रिय हुए जिसका फायदा अब प्रभुराम को मजबूत कर रहा हैं. शिवराज ने यहां सभा में मंच से जनता से कहा था कि शेजवार गुट की से डरने की जरुरत नहीं हैं. यहीं बात यहां कांग्रेस के मदन चौधरी को संकट में डाल रही है.

क्या बुंदेलखंड की 2 सीटें पर बीजेपी को मिलेगा समर्थन

सुरखी में बीजेपी प्रत्याशी गोविंद राजपूत मजबूत दिखाई दे रहे है. यहां कांग्रेस प्रत्याशी पारूल साहू को कार्यकर्ताओं की कमी से जूझना पड़ रहा है. यहां भूपेंद्र सिंह ने मजबूती से पार्टी की कमान संभाली हुई है. जिसका फायदा बीजेपी को मिल सकता है.

मलहरा में बीजेपी के प्रद्युम्न सिंह लोधी समाज के लोग पहले ही नाराज दिख रहे हैं. वहीं दूसरी ओर लोधी को कोरोना होने के कारण उन्हें भोपाल में भर्ती भी किया गया है. यहां कांग्रेस की साध्वी रामसिया भारती भारी नजर आ रही हैं.

क्या महाकौशल में दिखेगा बिसाहूलाल का कौशल

महाकौशल के अनूपपुर विधानसभा में मंत्री बिसाहूलाल साहू की स्थिति मजबूत होती नहर आ रही हैं. उसके पीछे सबसे बड़ी वजह उनका मंत्री होना है. वहीं कोल समुदाय से जुड़े एक बीजेपी नेता को शिवराज उपचुनाव से पहले ही दूर कर चुके है. यहां कांग्रेस से विश्वनाथ मैदान में हैं ​जिनकी स्थिति ठीक नहीं दिखाई दे रही हैं.