'क्रिकेट के भगवान' कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर क्रिकेट के अलावा खाना बनाने में भी काफी रुचि रखते हैं. सचिन ने Opoyi को बताया कि किचन में वह कभी भी जीरो पर आउट नहीं हुए हैं. पिछले साल सचिन ने अपनी मां के लिए बैगन का भरता बनाते हुए एक वीडियो शेयर किया था. इस साल अपनी शादी की 25वीं सालगिरह पर उन्होंने अपनी पत्नी अंजलि के लिए मैंगो कुल्फी बनाई. उन्होंने हमारे साथ बातचीत में बताया कि वो खाने के बारे में क्या सोचते हैं और क्रिकेट खेलने के दिनों में वह अपनी डाइट कैसे मेंटेन किया करते थे.

सवाल: सचिन, ज्यादातर लोग जानते हैं आपको खाना पसंद है. चलिए खाने के बारे में कुछ बातें करते हैं...

जवाब: हां बिलकुल. मैं जिस परिवार में पैदा हुआ वहां सभी खाने के शौकीन थे. सारस्वत ब्राह्मणों को मछली बहुत पसंद होती है. इसलिए मैं बहुत छोटी उम्र से मछली खा रहा हूं. लेकिन हाई-स्कूल से मेरी पसंद बिलकुल बदल गई. मुझे अलग-अलग क्षेत्रों के स्थानीय व्यंजन खाना बहुत पसंद है. खाना आपको क्षेत्र की संस्कृति से जोड़ता है और हर क्षेत्र की अपनी अलग संस्कृति होती है. ये हमको खाने के माध्यम से जोड़ के रखती है. जब मैं छोटा था, तब मैं बहुत तरह की चीजें खाने में पसंद करता था, उनमें से कुछ चीजें मुझे अभी भी बहुत पसंद हैं. बाद में क्रिकेट के चलते मैंने दुनिया घूमी. मैंने इस दौरान कई तरह के व्यंजनों को चखा. तो मेरा खाने के लिए प्यार सिर्फ पेट भरने तक ही सीमित नहीं है. मैं दिल से खाने का बहुत शौकीन हूं.

सवाल: कुछ समय पहले आपका बैगन का भरता बनाते हुए वीडियो वायरल हुआ था. बैगन भरता के पीछे क्या कहानी है?

जवाब: मुझे बचपन से ही बैगन भरता बहुत पसंद है और मैं हमेशा अपनी मां को ये व्यंजन तैयार करते हुए देखा करता था. बैगन का भरता बनाने का हर किसी का अपना तरीका होता है. विमेंस डे के दिन मैंने बैगन का भरता बनाने का सोचा और मैंने अपनी मां को भी खिलाया. उन्होंने इसके लिए मेरी खूब तारीफ की. मुझे अंजलि और अपनी मां को देखने के बाद वीडियो बनाने का विचार आया. हम हमेशा महिलाओं को किचन में खाना बनाते देखते हैं, कभी-कभी किचन में खुद खाना बनाने में क्या हर्ज है, इससे उनको भी आराम मिलेगा और इसलिए मैंने बैगन का भरता बनाया और वह काफी स्वादिष्ट भी निकला.

सवाल: एक डिश जो आपने बनाई हो और सही से न बन पाई हो?

जवाब: नहीं...(हंसते हुए). मैंने अभी तक कोई भी डिश खराब नहीं की है. खाने का शौकीन होने के नाते मुझे ये अंदाजा है कि किसी डिश में नमक और मसाला कितना होना चाहिए. तो अभी तक मेरी बनाई हुई कोई भी डिश फेल नहीं हुई है. हां, कभी-कभी कुछ चीजें डिश में डालना भूल जाता हूं, लेकिन फिरभी डिश खाने लायक रहती है. मेरे लिए, किचन में खाना बनाना स्ट्रेस घटाने का काम करता है, इसलिए मैं कोई भी डिश बहुत ध्यान से बनाता हूं.

सवाल: अपनी पसंदीदा खाने के व्यंजनों के नाम बताइए.

जवाब: बहुत सारे हैं. वड़ा पाव मेरा पसंदीदा है. मेरा बचपन दादर (मुंबई) में बीता है इसलिए मैंने कई महाराष्ट्रीयन व्यंजनों का आनंद लिया है. मेरे लिए वड़ा पाव अभी भी लिस्ट में टॉप पर है. मैं जहां भी जाता हूं, हमेशा मेरा मन मुंबई वापस जाकर वड़ा पाव खाने में लगा रहता है. असली मुंबईकर वड़ा पाव खाए बिना नहीं रह सकते. मछलियों में प्रॉन (झींगा) और बॉम्बे डक मेरी पसंदीदा है. बैगन भरता, मछली करी और क्रैब (केकड़ा) डिश खाने का मजा ही अलग है. जब मैं क्रिकेट खेलता था, मुझे डाइट का ख्याल रखना होता था और ये ध्यान रखना होता था कि मैं अपनी पसंदीदा डिश कितनी खाऊं. लेकिन अब मैं बिना किसी लिमिट के खाता हूं. मेरे विचार में आनंद लेकर खाइए और उसी हिसाब से व्यायाम भी कीजिए.

सवाल: आपने दुनिया घूमी है. आपकी पसंदीदा अंतर्राष्ट्रीय डिश कौन-कौन सी है?

जवाब: मेरी फेवरेट डिश की लिस्ट बहुत लंबी है. मैं जहां भी जाता हूं, वहां की सभी डिश चखने की कोशिश करता हूं. हर क्षेत्र का अपना स्वाद होता है. जब आप कुछ खास मौसम में पकवान खाते हैं तो यह और मजेदार होता है. जब मैंने जापान की यात्रा की, तो मुझे सुशी बहुत पसंद आई और मुझे आज भी सुशी बहुत पसंद है. मुझे लंदन में खाना भी बहुत पसंद है, वहां आपको बहुत सारे भारतीय पकवान भी मिलते हैं. साथ ही उनकी एक अपनी संस्कृति भी है. कीमा पराठा और लस्सी मेरी पाकिस्तान की फेवरेट डिश में से है. इस बात का ध्यान रखना होता है कि आप कीमा पराठा और लस्सी के बाद थोड़ा सो लें. भारत और पाकिस्तान में खाना बनाने के तरीके में काफी समानता है और दोनों जगह मसाले खाने का स्वाद बढ़ाते हैं.

इन सबके बाद भी, मैं अपनी मां के हाथ के बनाए खाने का स्वाद कभी नहीं भूलता. उनकी उम्र अब ज्यादा हो गई है, लेकिन वह कोशिश करती हैं. अब वह किचन में अधिक समय नहीं बिताती. मैं कभी भी उनके हाथ के खाने का स्वाद नहीं भूल सकता. बहुत से खाने मेरे पसंदीदा हैं, लेकिन मुझे दाल भात की साधारण महाराष्ट्रीयन डिश खाने के बाद ही संतुष्टि महसूस होती है.

सवाल: आप दुनियाभर में क्रिकेट के लिए जाने जाते हैं, लेकिन कम ही लोग आपके सामाजिक कार्यों के बारे में जानते हैं. क्या आप इसके बार में बात कर सकते हैं?

जवाब: मुझे लगता है कि आप जिस समाज में पैदा हुए हैं, उसे वापस देना चाहिए. आज भी हमारे समाज में बहुत से लोग ऐसे हैं जिन्हें एक दिन में दो बार भोजन नहीं मिलता है. ऐसे में आपके पास जो है आप उससे उनकी मदद करते हैं. निश्चित रूप से हम कम से कम कुछ लोगों के लिए भोजन और शिक्षा का खर्च उठा सकते हैं. जिस समाज से आपको इतना कुछ मिला है, उसे वापस देने की खुशी अलग ही होती है. इसीलिए, सामाजिक कार्यों में मेरी रुचि स्थायी रूप से बनी रही. सामाजिक कार्य करना हममें से प्रत्येक का कर्तव्य है. सामाजिक कार्य का अर्थ केवल सहायता करना ही नहीं है; हमें विश्वास करना चाहिए कि यह हमारा कर्तव्य है.