जन अधिकार पार्टी (लोकतांत्रिक) प्रमुख राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव को लोकसभा चुनाव में बड़ी हार का सामना करना पड़ा था. लेकिन पप्पू यादव ने शायद अभी हार को स्वीकार नहीं किया है. क्योंकि पप्पू यादव बिहार विधानसभा चुनाव, 2020 के लिए नए सिरे से काम पर लग गए हैं. उन्होंने हाल ही में प्रगतिशील लोकतांत्रिक गठबंधन यानी पीडीए (PDA) बनाने की घोषणा की. जो लालू यादव की पार्टी आरजेडी के लिए अच्छी खबर नहीं हो सकती है.

लोकसभा चुनाव 2019 में मधेपुरा सीट से पप्पू यादव और सुपौल सीट से उनकी पत्नी रंजीता रंजन चुनाव हार गई थीं. इस चुनाव में एनडीए ने सभी 40 सीटों में एक सीट छोड़कर सभी पर अपना कब्जा जमाया था.

लेकिन अब पप्पू यादव ने विधानसभा चुनाव के लिए चंद्रशेखर आजाद की अध्यक्षता वाली आजाद समाज पार्टी, एमके फैजी के नेतृत्व वाली सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी यानी SDPI, बीपीएल मातंग की बहुजन मुक्ति पार्टी और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के साथ मिलकर प्रगतिशील लोकतांत्रिक गठबंधन (PDA)बनाई है.

गठबंधन बनाने के दो दिनों बाद Opoyi से बात करते हुए पप्पू यादव ने कहा कि, कॉमन मिनिमम प्रोग्राम के साथ गठबंधन बनाया गया है और सीट शेयरिंग के लिए भी इसी फॉर्मूले का पालन किया जाएगा. उन्होंने कहा कि, सीट शेयरिंग कोई बड़ा मुद्दा नहीं है वह केवल पीडीए में और अधिक पार्टनर को लाने की कोशिश कर रहे हैं.

2015 के विधानसभा चुनाव में भी 52 वर्षीय पप्पू यादव को सफलता नहीं मिली थी और उनके सभी उम्मीदवार हार गए थे. इस चुनाव में उनकी पार्टी को केवल 2 प्रतिशत वोट मिले थे. लेकिन हार के बाद भी वह राज्य में सबसे अधिक सक्रिय राजनेताओं में से एक हैं. 6 फुट 1 इंच और 140 किलो के पप्पू यादव एक टीशर्ट में आपको हर जगह दिख जाएंगे. चाहे वह बाढ़ से प्रभावित लोगों के बीच हों, या बेरोजगार प्रवासी मजदूरों के बीच जो कोरोना महामारी के दौर में मजबूरन अपने गांव लौट आए.

हालांकि, आगामी चुनावों पर उनका क्या प्रभाव है इस बारे में कोई जानकारी नहीं है. लेकिन विश्लेषकों का मानना है कि वह अपने पुराने गुरु लालू प्रसाद यादव की पार्टी राष्ट्रीय जनता दल के वोट काटेंगे. राजनीतिक समीक्षक मणिकांत ठाकुर का कहना है कि, 'उच्च जाति के मतदाता अभी भी JAP उम्मीदवारों के समर्थन के बारे में आश्वस्त नहीं हैं, हालांकि वे पप्पू यादव के सामाजिक कार्य को पसंद करते हैं. जाति-आधारित चुनाव में, पप्पू यादव की JAP और लालू प्रसाद की RJD के पास समान वोटबैंक है. ऐसे में अधिक संभावना है कि JAP के उम्मीदवार आरजेडी या महागठबंधन उम्मीदवार के वोट काटेंगे'.

बता दें, 2015 में लालू यादव और पप्पू यादव के रिश्तों में तब खटाश आ गई जब उन्हें पार्टी विरोधी गतिविधियों के लिए आरेजी से बाहर कर दिया गया.

आरजेडी से निकाले जाने को लेकर पूर्व सांसद पप्पू यादव का कहना है कि, पुत्र मोह में मुझको पार्टी से निकाल दिया, क्योंकि उनको लग रहा था कि मेरे रहते उनका बेटा आरेडी का उत्तराधिकारी नहीं बन सकेगा.

विश्लेषकों का मानना ​​है कि यह पप्पू यादव के लिए आरजेडी से बदला लेने का सही मौका है. जब लालू यादव जेल में बंद हैं और तेजस्वी यादव जो पार्टी को संभालने में पूरी तरह से सक्षम नहीं हैं.

आपको बता दें कि इन सियासी खेलों से अलग पप्पू यादव के बेटे सार्थक रंजन जो एक क्रिकेटर हैं और दिल्ली के लिए खेलते हैं. जबकि उनकी बेटी प्रखर राष्ट्रीय स्तर की बॉस्केटबॉल खिलाड़ी हैं.