प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार (28 अगस्त) शाम को अमृतसर में पुनर्निर्मित जलियांवाला बाग परिसर का वस्तुतः उद्घाटन किया. साल 2019 में जलियांवाला बाग हत्याकांड के 100 साल पूरे होने के मौके पर केंद्र सरकार द्वारा इसके लिए 20 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए थे. फरवरी 2019 से ही इसे जनता के लिए बंद कर दिया गया था, और तभी से इसका काम चल रहा था. अब जब इस ऐतिहासिक स्थान की मरमत के बाद से ही सरकार ने यहां बहुत से बदलाव किए हैं, जिसे देख लोग गुस्से से आग बबूला हो रहे हैं.

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स्मारक को पहली बार तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद ने 13 अप्रैल, 1919 को नरसंहार के पीड़ितों के प्रति कृतज्ञ राष्ट्र की श्रद्धांजलि के रूप में खोला था, जब राष्ट्रवादी नेताओं की गिरफ्तारी के विरोध में एक बड़ी भीड़ बाग में एकत्र हुई थी. भारी भीड़ के जवाब में, ब्रिटिश अधिकारी कर्नल रेजिनाल्ड एडवर्ड हैरी डायर ने अपने सैनिकों को भीड़ पर गोलियां चलाने का आदेश दिया, जिसमें कई सौ लोग मारे गए. आइए जानते है क्या बदलाव किए गए हैं:

लेजर और साउंड शो: जलियांवाला बाग में रोजाना लेजर और साउंड शो होगा. 28 मिनट का ये साउंड एंड लाइट शो रोजाना शाम को होगा. इस दौरान 13 अप्रैल, 1919 की घटनाओं को दिखाया जाएगा. यह शो मुफ्त होगा. कुछ लोग इस साउंड शो को लेकर भी आपत्ति जता रहे हैं.

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नई मूर्तियां लगाई गईं: स्मारक के जिस बदलाव का सबसे ज्यादा विरोध हुआ है, वो है गैलरी. इस गैलरी से ही लोग उस दुर्भाग्यपूर्ण दिन पार्क में आए थे, लेकिन कभी वापस नहीं लौटे. इस गैलरी में नई मूर्तियां लगाई गई है जो विभिन्न क्षेत्रों के सामान्य पंजाबियों का प्रतिनिधित्व करती हैं. हालांकि अथॉरिटीज़ का कहना है कि मूर्तियों के बनाते वक्त गोलियों के निशान वाली जगहों को छोड़ दिया गया है.

शहीदी कुएं में अब झांक नहीं पाएंगे : जब जनरल डायर ने जलियांवाला बाग में निहत्थे लोगों पर गोलियां चलवाई थीं तो बहुत से लोग जान बचाने के लिए परिसर में बने कुएं में कूद गए थे. जलियांवाला बाग का ये कुआं एक महत्वपूर्ण साइट की तरह है. लेकिन अब इसमें कुछ बदलाव किया गया है. पहले जहां लोग इस कुएं में झांककर देख सकते थे, अब ऐसा नहीं कर पाएंगे. शहीदी कुएं को एक शीशे की चादर से ढक दिया गया है. सरकार को इस फैसले पर काफी आलोचना झेलनी पड़ी. इसके अलावा मुख्य स्मारक के चारों ओर एक तालाब बनाया गया है, जहां कमल के फूल दिखाई देते हैं. जलियावाला बाग कैंपस में दाखिल होने और बाहर निकलने के प्वाइंट्स को बदल दिया गया है.

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इस विषय पर हो रही खूब आलोचना

वाम दल के नेता सीताराम येचुरी ने भी जलियांवाला बाग (Jallianwala Bagh) के नवीनीकरण की अलोचना की. उन्होंने कहा कि यह हमारे शहीदों का अपमान है. बैसाखी के लिए इकट्ठा हुए हिंदू, मुस्लिम, सिखों के जलियांवाला बाग हत्याकांड ने हमारे स्वतंत्रता संग्राम को गति दी, जो लोग स्वतंत्रता संग्राम से दूर रहे वही ऐसा काम कर सकते हैं.कांग्रेस नेता हसीबा ने कहा कि जलियांवाला बाग हत्याकांड में जश्न जैसी क्या चीज है, जहां लाइट और साउंड की जरूरत हो.

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राष्ट्रवाद की राजनीति

पंजाब में चुनाव होने में अब कुछ ही महीने बचे हैं और राष्ट्रवाद की राजनीति ने जोर पकड़ लिया है. पिछले हफ्ते ही, पंजाब के मुख्यमंत्री ने नरसंहार के "अज्ञात शहीदों को श्रद्धांजलि" के रूप में एक दूसरे स्मारक, जलियांवाला बाग शताब्दी स्मारक पार्क का उद्घाटन करते हुए कहा था कि मूल स्थल पर स्मारक उन शहीदों को याद करने के लिए बनाया गया था जिनकी पहचान की गई थी .दूसरा स्मारक स्थल से लगभग 3 किमी दूर रंजीत एवेन्यू में अमृत आनंद पार्क में 1.5 एकड़ भूमि पर बनाया गया है.

कैप्टन अमरिंदर सिंह, जो जलियांवाला बाग के ट्रस्टी भी हैं. वह इस कार्यक्रम में शामिल होंगे. लोकसभा में विपक्षी कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी को भी न्योता भेजा गया है, जो एक ट्रस्टी भी हैं. केंद्र 2019 में कांग्रेस अध्यक्ष को ट्रस्टियों की सूची से हटाने के लिए जलियांवाला बाग संशोधन विधेयक लाया था.

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