बुलंद आवाज, दमदार अभिनय और शानदार संवाद अदायगी के दम पर 50 सालों से अदाकारी की दुनिया में राज कर रहे बॉलीवुड अभिनेता रजा मुराद इस साल इंडसट्री में अपना गोल्डन जुबली साल पूरा कर रहे हैं. पचास साल के इस सफर में उन्होंने सैकड़ों फिल्में और कई यादगार रोल निभाए हैं. खास बात यह है कि आज भी वह फिल्मों में व्यस्त हैं और अपनी आखिरी सांस तक काम करने की तमन्ना रखते हैं. जल्द ही वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जिंदगी पर बेस्ड फिल्म इंडिया इन माई वेंस में एक कश्मीरी मुसलमान के किरदार में नजर आएंगे. पिछले दिनों फिल्म के मुहूर्त पर मौजूद रजा मुराद ने साझा की कई दिलचस्प बातें.

यह भी पढ़ेंः शनाया कपूर ने शयेर की जबरदस्त बैली डांस Video, जल्द करेंगी करण जौहर की फिल्म से डेब्यू

डायमंड जुबली मनाना चाहता हूं

इस इंडस्ट्री में मुझे पचास साल पूरे हो गए हैं. 500 फिल्में कर चुका हूं लेकिन आज भी लगता है कि जैसे कल की ही बात है. आज भी मैं उतनी ही उर्जा से अपने किरदारों को निभाता हूं जैसे पहली फिल्म में किया था. मुझे हमेशा यही लगता है कि अभी बहुत काम बाकी है मेरे लिए. मैं अपनी जिंदगी की आखिरी सांस तक बस काम करना चाहता हूं और ऐक्टिंग की पारी में मैं डायमंड जुबली मनाना चाहता हूं.

मुझे मेरी उम्मीदों से ज्यादा दिया है

कई बार यह सवाल होता है कि ऐक्टिंग में कैसे आए? कई बार लोग जवाब देते हैं कि ऐक्टिंग तो मेरे बचपन का शौक था. लेकिन मैं ऐसा नहीं कहता. मेरा मानना है कि सिर्फ शौक से कुछ नहीं होता सलाहियत होना जरूरी है. शौक के चलते तो कई इस चकाचौंद में आते हैं और कहीं खो भी जाते है. कुछ ही दिनों में लोग उन्हें भूल जाते हैं. लेकिन जिनके पास अदाकारी की सलाहियत होती है उन्हें ना यह इुडस्ट्री भूलती है और ना ही लोग. मैं अपनी बात करूं तो इंडस्ट्री ने मुझे बहुत कुछ दिया है. मेरी उम्मीद से भी ज्यादा. मुझे लगता है मुझे जितना मिला है मैं उतना वापस भी नहीं कर पाया हूं.

यह भी पढ़ेंः Video: अनुपम खेर ने पत्नी के लिए प्रार्थनाएं करने वालों को कहा शुक्रिया, बोले- आपने मुझे इमोशनल कर दिया

आवाज पर लोगों को शक हो जाता था

यह सच है कि मेरी आवाज को भी लोगों ने बहुत पसंद किया है. भले ही मेरा चेहरा ना दिखे लेकिन आवाज से लोग पहचान जाते हैं कि यह रजा मुराद है. मुझे मेरी आवाज ने भी एक खास पहचान दिलवाई है लेकिन सिर्फ आवाज को मैं सिर्फ एक हिस्सा मानता हूं. सिर्फ आवाज ही काफी नहीं होती अदाकारी में. मेरे एक दोस्त अबरार साहब ने मेरी आवाज पर ही एक शेर लिखा था कि

ख्वाबों की तरह हकीकत में बुना जाय मुझे

कोई मुश्किल की घड़ी हो तो चुना जाए मुझे

सिर्फ आवाज ही पहचान नहीं है मेरी

मेरी आवाज के आगे भी सुना जाय मुझे.

आवाज के सवाल पर मुझे अपने शुरुआती दिनों का किस्सा याद आ रहा है. जब मैंने पहली फिल्म की थी तो लोगों ने मेरे काम की तारीफ की लेकिन साथ मे यह भी कहा कि काम तो ठीक है लेकिन आवाज इसके वालिद मुराद साहब की है. देखने में मैं दुबला पतला था लोगों को यकीन ही नहीं होता था कि इतनी भारी भरकम आवाज इसी दुबले पतले लड़के की है.

यह भी पढ़ेंः आलिया भट्ट को कोरोना होने के बाद आया मां सोनी रजदान का बयान, बोलीं- अब मुझे डल लग रहा है

अब राजनीति में नहीं आना है

कुछ साल पहले मैंने भी राजनीति में आने के लिए कदम बढ़ाया था लेकिन मुझे बहुत जल्दी अहसास हो गया कि यह काम मेरे लिए नहीं है. अब दोबारा कभी इस काम में हाथ नहीं आजमाना है. मुझे जो इस देश के लिए और यहां के लोगों के लिए करना है वह बिना राजनीति में आए हुए भी कर रहा हूं. फिर वह चाहे चैरिटी हो या फिर किसी भी तरह से लोगों की मदद करना हो.

सांस रोक कर खींचवाता हूं सेल्फी

जहां भी जाता हूं लोगों का प्यार मुझे बहुत मिलता है. लोग सेल्फी लेने के लिए आ जाते हैं लेकिन इस कोरोना काम में अहतियात तो जरूरी है. मैं किसी को मना नहीं करता हूं लेकिन सेल्फी जब देता हूं तो सांस रोक लेता हूं. इस बीमारी से निपटने के लिए अहतियात ही सबसे जरूरी है. मैंने पहला टीका भी लगवा लिया है कुछ दिनों के बाद दूसरा टीका भी लगना है. मैं लोगों से भी यही अपील करना चाहूंगा कि सावधानी जरूर बर्ते. सरकार अपना काम कर रही है लेकिन वह घर घर जाकर चेक नहीं कर सकती. लोगों को अपने लिए खुद की जागरूक होना पड़ेगा.

यह भी पढ़ेंः पति Saahil Sehgal से अलग हुईं एक्ट्रेस Kirti Kulhari, इंस्टाग्राम पर पोस्ट साझा कर दी जानकारी