प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को राष्ट्र के नाम संबोधन में देश के सभी नागरिकों को मुफ्त कोरोना वैक्सीन लगवाने का ऐलान किया. इसके बाद जहां बीजेपी शाषित राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने केंद्र सरकार का इस फैसले की तारीफ की, वहीं विपक्षी नेताओं ने पीएम मोदी के इस कदम को सुप्रीम कोर्ट के दबाव में लिया गया फैसला बताया और ये भी कहा कि ऐसा करने में देर की गई. 

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दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सीसोदिया ने ट्वीट कर कहा, "हम माननीय सुप्रीम कोर्ट का आभार व्यक्त करते हैं कि उनके दख़ल के बाद देश भर में हर उम्र हर वर्ग के लोगों को मुफ़्त वैक्सीन उपलब्ध होगी. केंद्र सरकार चाहती तो बहुत पहले यह कर सकती थी लेकिन केंद्र की नीतियों के चलते न राज्य वैक्सीन ख़रीद पा रहे थे और न केंद्र सरकार दे रही थी."

कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने क्या कहा, "जब राज्य की सरकारों ने केंद्र पर दबाव डालकर मुफ्त में वैक्सीन देने की बात कही और सुप्रीम कोर्ट ने दखल दिया उसके बाद ही प्रधानमंत्री को सभी लोगों के लिए वैक्सीन मुफ्त करने का फैसला करना पड़ा. इससे साफ होता है कि PM ने यह फैसला दबाव में लिया है."

छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव ने कहा, "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के सभी लोगों के लिए अब वैक्सीन मुफ्त कर दी है. देर आए दुरुस्त आए, जो होना चाहिए था वह फिर से हो रहा है. वैक्सीन नीति में केंद्र सरकार को पहले कोई बदलाव नहीं करना चाहिए था."

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NCP के नेता नवाब मलिक ने कहा, "प्रधानमंत्री ने सभी लोगों को मुफ्त में वैक्सीन लगाने का जो फैसला किया है वह उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के दबाव में आकर किया है. केंद्र सरकार ने कोरोना में अपनी विफलताओं को छुपाने के लिए यह निर्णय लिया है. सरकार डैमेज कंट्रोल करने में लगी है." 

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल बोले, "सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को फटकार लगाई और लोगों ने भी कहा तब जाकर केंद्र सरकार ने सभी के लिए वैक्सीन मुफ्त करने का निर्णय लिया." 

TMC नेता सौगत रॉय ने कहा, "PM को लगा उनकी वैक्सीन नीति नाकाम हो रही है. आगे यूपी चुनाव है. सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट को लेकर भी लोग नाराज थे. पांच राज्यों के चुनाव में असम छोड़कर BJP सब जगह हार गई. उन्होंने अपनी स्थिति को फिर से मजबूत करने के लिए सभी को वैक्सीन मुफ्त में देने का फैसला किया."

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