प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को राजनीतिक वंशवाद को लोकतंत्र का ‘‘सबसे बड़ा दुश्मन’’ करार दिया और इसे जड़ से उखाड़ फेंकने का आह्वान किया. साथ ही उन्होंने दावा किया कि अब केवल ‘सरनेम’ के सहारे चुनाव जीतने वालों के दिन लदने लगे हैं.

वीडियो कान्फ्रेंस के जरिए दूसरे राष्ट्रीय युवा संसद महोत्सव के समापन सत्र को संबोधित करते हुए उन्होंने राजनीति को ‘‘सार्थक बदलाव’’ का ‘‘सशक्त माध्यम’’ बताते हुए कहा कि जब तक देश का सामान्य युवा राजनीति में नहीं आएगा,‘‘वंशवाद का जहर’’ इसी तरह लोकतंत्र को कमजोर करता रहेगा. उन्होंने कहा कि देश को नयी ऊंचाइयों पर ले जाने का काम तथा उसे आत्मनिर्भर बनाने का काम देश के युवाओं के कंधे पर है.

पिछले छह वर्षो में देश की राजनीति में आए बदलावों का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने विपक्षी दलों पर जमकर निशाना साधा और बिना किसी का नाम लिए कहा कि भ्रष्टाचार जिनकी विरासत थी, उनका भ्रष्टाचार ही आज उन पर बोझ बन गया है. उन्होंने कहा, ‘‘यह देश के सामान्य नागरिक की जागरूकता की ताकत है कि वो लाख कोशिशों के बाद भी इससे उबर नहीं पा रहे हैं. देश ईमानदारों को प्यार दे रहा है.’’

मोदी ने कहा कि इसके बावजूद कुछ बदलाव अभी भी बाकी हैं और इन बदलावों को लाने के लिए देश के युवाओं को आगे आना होगा. उन्होंने कहा, ‘‘लोकतंत्र का एक सबसे बड़ा दुश्मन पनप रहा है और वह है राजनीतिक वंशवाद. राजनीतिक वंशवाद देश के सामने ऐसी ही चुनौती है, जिसे जड़ से उखाड़ना है. यह बात सही है कि अब केवल ‘सरनेम’ के सहारे चुनाव जीतने वालों के दिन लदने लगे हैं. लेकिन राजनीति में वंशवाद का यह रोग अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है.’’

उन्होंने कहा कि देश की राजनीति में अभी भी ऐसे लोग हैं जिनका आचार, विचार और लक्ष्य सब कुछ अपने परिवार की राजनीति और राजनीति में अपने परिवार को बचाने का ही है. उन्होंने कहा कि राजनीतिक वंशवाद लोकतंत्र में एक ‘‘नए रूप की तानाशाही’’ के साथ ही देश पर अक्षमता का बोझ भी बढ़ा देता है. उन्होंने कहा, ‘‘राजनीतिक वंशवाद, देश प्रथम के बजाय सिर्फ मैं और मेरा परिवार की भावना को मजबूत करता है. यह भारत में राजनीतिक और सामाजिक भ्रष्टाचार का भी एक बहुत बड़ा कारण है.’’

प्रधानमंत्री ने कहा कि वंशवाद की वजह से राजनीति में आगे बढ़े लोगों को लगता है कि उनके पहली की पीढ़ियों के भ्रष्टाचार का हिसाब नहीं हुआ तो उनका भी कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता. उन्होंने कहा, ‘‘वे तो अपने घर में ही इस प्रकार के विकृत उदाहरण भी देखते हैं. इसलिए ऐसे लोगों का कानून के प्रति ना सम्मान होता है ना ही उन्हें कानून का डर होता है.’’ मोदी ने कहा कि इस स्थिति को बदलने का जिम्मा देश की युवा पीढ़ी पर है.

उन्होंने कहा, ‘‘लेना और पाना छोड़, कुछ कर गुजरने के इरादे से जब तक देश का सामान्य युवा राजनीति में नहीं आएगा, वंशवाद का यह जहर इसी तरह हमारे लोकतंत्र को कमजोर करता रहेगा.’’

उन्होंने कहा कि देश के लोकतंत्र को बचाने के लिए युवाओं का राजनीति में आना जरूरी है. उन्होंने कहा, ‘‘आपकी जिम्मेदारी है कि भारत के भविष्य का नेतृत्व करें. आपकी यह जिम्मेदारी देश की राजनीति को लेकर भी है. क्योंकि राजनीति देश में सार्थक बदलाव लाने का सशक्त माध्यम है. हर क्षेत्र की तरह, राजनीति को भी युवाओं की बहुत ज्यादा जरूरत है. नयी सोच, नयी उर्जा, नये सपने और नई उमंग की देश की राजनीति को बहुत जरूरत है.’’

प्रधानमंत्री ने कहा कि लोगों के मन में यह धारणा बन गई थी कि अगर कोई नौजवान राजनीति के क्षेत्र में जाता है तो वह बर्बाद हो जायेगा. उन्होंने कहा कि लोग यहां तक भी मानने लगे थे कि सब कुछ बदल सकता है, लेकिन सियासत नहीं बदल सकती. उन्होंने कहा कि आज स्थिति में बदलाव आया है और ईमानदार लोगों को भी राजनीति में जगह मिल रही है. उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन आज आप देखिए कि देश की जनता इतनी जागरूक हो गई है कि वह राजनीति में ईमानदार लोगों के साथ खड़ी होती है.’’ उन्होंने कहा कि इसकी वजह से अब जनप्रतिनिधि भी यह समझने लगे हैं कि अगले चुनाव में जाना है तो कामों का हिसाब पुख्ता होना चाहिए. इस अवसर पर लोकसभा अध्‍यक्ष ओम बिरला, शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक और युवा तथा खेल मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू भी उपस्थित थे.

राष्ट्रीय युवा महोत्सव हर साल 12 से 16 जनवरी तक मनाया जाता है. 12 जनवरी को स्वामी विवेकानंद की जयंती है. इसे राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाया जाता है. इस साल राष्ट्रीय युवा महोत्सव के साथ राष्‍ट्रीय युवा संसद समारोह भी आयोजित किया जा रहा है. राष्ट्रीय युवा महोत्सव का उद्देश्‍य देश के युवाओं की प्रतिभा सामने लाने तथा उन्‍हें अपनी प्रतिभा को दर्शाने का मंच प्रदान करना है.