टीवी अदाकारा प्रेक्षा मेहता ने इंदौर में 25 मई को अपने घर पर फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी. सुसाइड नोट में प्रेक्षा ने आत्महत्या का कारण काम न मिलना बताया था. वह सफल अदाकारा बनने का सपना पूरा नहीं कर पाने के चलते अंदर से टूट गईं थी और काफी टाइम से डिप्रेशन में चल रही थीं. प्रेक्षा के आखिरी इंस्टाग्राम स्टोरी से भी उनक मानसिक तनाव का पता चलता है. उन्होंने पाश की कविता की एक पंक्ति क्वोट की थी- ‘सबसे बुरा होता है, सपनों का मर जाना.'

25 वर्षीय अदाकारा ने अपने एक्टिंग करियर की शुरुआत मध्य प्रदेश में थियेटर के साथ की थी. उनका पहला नाटक 'ड्रामा फैक्ट्री' के बैनर तले हुआ था. सआदत हसन मंटो की एक कहानी पर आधारित नाटक का नाम 'खोल दो' था. इसके अलावा प्रेक्षा शॉर्ट फिल्म 'उल्टी सलवार' में भी नजर आई थीं.

उसके बाद वो मुंबई शिफ्ट हो गईं और क्राइम पेट्रोल, तू आशिकी, लाल इश्क, सिद्धि विनायकऔर मेरी दुर्गा जैसे टीवी शो में काम किया. वह अक्षय कुमार की बॉलीवुड मूवी 'पैडमैन' में भी नजर आईं थीं. साथ ही वह कुछ म्यूजिक वीडियो जैसे 'तोरे नैना' और 'सखा' में भी नजर आईं.

प्रेक्षा के परिवार के मुताबिक आत्महत्या से एक दिन पहले पूरा परिवार साथ में कार्ड्स खेल रहा था, लेकिन प्रेक्षा अकेले सीढ़ियों में बैठी थीं. प्रेक्षा का स्वभाव काफी चुलबुला था, लेकिन काम न मिलने के चलते अचानक उनके स्वभाव में बदलाव आ गया और वह शांत रहने लगी थीं. 

प्रेक्षा मेहता ने सुसाइड नोट में लिखा था- मेरे टूटे हुए सपनों ने मेरे विश्वास का दम तोड़ दिया है. मैं मरे हुए सपनों के साथ नहीं जी सकती। मैं पिछले एक साल से लगातार ट्राय कर रही थी लेकिन अब मैं थक गई हूं मैं अब और इस निगेटिविटी के साथ नहीं रह सकती.