नयी दिल्ली 26 मई (भाषा) सार्वजानिक क्षेत्र की कंपनी एनबीसीसी ने जेपी इंफ्राटेक की रिणदाताओं की समिति (सीआईसी) द्वारा उसके प्रस्ताव को ठुकराए जाने के बाद बुधवार को जोर देते हुए कहा कि उसका प्रस्ताव पूरी तरह से वैध है।

एनबीसीसी ने कहा कि उसका प्रस्ताव पूरी तरह से वैध है। यदि नयी बोली प्रस्तुत करने की अनुमति दी जाती है तो वह अंतरिम समाधान पेशेवर (आईआरपी) अनुज जैन द्वारा उठाई गई आपत्तियों को दूर करने का प्रयास करेगी।

इससे पहले 24 मई (सोमवार) की बैठक में सीओसी ने सुरक्षा समूह के प्रस्ताव पर मतदान को टाल दिया। उसने अब 27-28 मई को नयी बैठक बुलाई है जिसमे सुरक्षा समूह और एनबीसीसी को अंतिम प्रस्ताव पेश करने के लिए अतिरिक्त समय दिए जाने के निर्णय पर मतदान किया जाएगा।

जेपी इंफ्रा के आईआरपी को लिखे पत्र में एनबीसीसी ने कहा कि उसने असंतुष्ट सीओसी सदस्यों से जुड़ी पेशकश में गैर-अनुपालन मुद्दों पर उनकी आपत्तियों का जवाब दिया है।

एनबीसीसी ने 18 मई को सीओसी के समक्ष प्रस्ताव पेश किया था और 22 मई को उसी प्रस्ताव में कुछ और जोड़ा गया था। लेकिन दोनों प्रस्ताव को आईआरपी ने अनुपालन पर खरा नहीं उतरने वाला घोषित कर दिया गया।

एनबीसीसी ने कहा, ‘‘हमने श्रेष्ठ संभावित क़ानूनी सलाह लेने और सभी पहलुओं का अध्यन करने के बाद एक नया प्रस्ताव पेश किया। असंतुष्ट सीओसी सदस्यों के लिए पूरे परिसमापन मूल्य को ध्यान में रखते हुए प्रस्ताव में प्रावधान जोड़े गए है।’’

उसने आईआरपी को लिखे पत्र में कहा, ‘‘हम अपने प्रस्ताव के प्रति पूरी तरह से प्रतिबद्ध है जिसमे बीस हजार घर खरीदने वालों को मकान मुहैया कराने के लिए कहा है। हम आपकी बात पर विचार करने के लिए तैयार हैं और आवश्यक संशोधन के लिए अपने बोर्ड के सामने रखेंगे।’’

गौरतलब है कि जेपी इंफ्राटेक की ऋणदाता समिति ने एनबीसीसी की बोली को दिवाला कानून के कुछ प्रावधानों के अनुरूप नहीं पाए जाने का हवाला देते हुए खारिज कर दिया था।

इस वर्ष मार्च में उच्चतम न्यायालय ने जेपी इंफ्राटेक के लिये केवल एनबीसीसी और सुरक्षा समूह से बोलियां मंगाने का आदेश दिया था। शीर्ष अदालत ने 45 दिनों में समाधान प्रक्रिया पूरी करने का भी निर्देश दिया था। इस समयसीमा की अवधि हालांकि आठ मई को पूरी हो गया और जेपी ने इस संबंध में समय सीमा बढ़ाने को लेकर याचिका भी दायर की थी।

जेपी इंफ्राटेक अगस्त 2017 में नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) द्वारा आईडीबीआई बैंक के नेतृत्व वाले बैंक समूह के एक आवेदन को स्वीकार करने के बाद दिवाला प्रक्रिया में चली गई थी।

सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी ने कहा है कि उच्चतम न्यायालय के 24 मार्च के फैसले में असंतुष्ठ वित्तीय रिणदाताओं के लिये पूर्ण परिसमापन मूल्य का प्रावधान किये जाने के बारे में ही कहा गया है। इसमें किसी प्रकार की कोई गारंटी के बारे में जिक्र नहीं है। इस फैसले में केवल एनबीसीसी और सुरक्षा समूह से ही बोलियां आमंत्रित किये जाने को कहा गया था।

भाषा जतिन

महाबीर

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