इनकम टैक्स डिपार्टमेंट (Income Tax) ने गुरुवार सुबह मीडिया ग्रुप दैनिक भास्कर के कई दफ्तरों पर छापेमारी की. न्यूज एजेंसी PTI को आधिकारिक सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, भास्कर के भोपाल, जयपुर, अहमदाबाद और देश के कुछ अन्य स्थानों पर स्थित दफ्तरों में छापेमारी की जा रही है.

विपक्षी पार्टियों ने इस छापेमारी को बदले की कार्रवाई करार दिया है. राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोल गहलोत से लेकर मध्य प्रदेश के पूर्व सीएम कमल नाथ तक ने इसका विरोध किया है. विपक्ष का आरोप है कि दैनिक भास्कर ने कोरोना वायरस की दूसरी लहर के दौरान 'कोविड कुप्रबंधन' को लेकर व्यापक रिपोर्टिंग की थी, इसलिए ये कार्रवाई हुई. 

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क्या बोले अशोक गहलोत? 

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इस मामले में ट्वीट करते हुए कहा, "दैनिक भास्कर अखबार और भारत समाचार न्यूज़ चैनल के कार्यालयों पर इनकम टैक्स का छापा मीडिया को दबाने का एक प्रयास है. मोदी सरकार अपनी रत्तीभर आलोचना भी बर्दाश्त नहीं कर सकती है. यह भाजपा की फासीवादी मानसिकता है जो लोकतंत्र में सच्चाई का आइना देखना भी पसंद नहीं करती है." 

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दिग्विजय और कमलनाथ ने भी जताई आपत्ति 

मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने ट्विटर पर कहा कि राज्य की राजधानी भोपाल में प्रेस कॉम्प्लेक्स में अपने कार्यालय सहित समूह के आधा दर्जन परिसरों में कर अधिकारी मौजूद हैं.

वहीं मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ ने ट्वीट कर कहा, "सच को देश भर में निर्भिकता से उजागर कर रहे दैनिक भास्कर मीडिया समूह को दबाने का काम शुरू हो गया है ? अपने विरोधियों को दबाने के लिए सच को सामने आने से रोकने के लिए ईडी, आईटी व अन्य एजेंसियो का दुरुपयोग यह सरकार शुरू से ही करती रही है और यह काम आज भी जारी है?" 

वहीं TMC सांसद महुआ मोइत्रा ने ट्वीट कर कहा, "दूसरी कोविड लहर की तबाही पर रिपोर्टिंग को लेकर दैनिक भास्कर के कार्यालयों और प्रमोटर के घरों पर आईटी छापे. अगर आप 'गोदीमीडिया' की तरह रंगेंगे नहीं तो आपको कीमत चुकानी होगी!"

कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने भी ट्वीट कर कहा है कि दैनिक भास्कर पर कार्रवाई की वजह मोदी सरकार के कोविड कुप्रबंधन पर उसकी रिपोर्टिंग है. उन्होंने इसे 'मोदीफाइड इमरजेंसी' करार दिया है. 

इनकम टैक्स की ओर से अभी तक इस मामले में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है.  

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